
बिल्ली की आंखें अंधेरे में चमकती हुई दिखाई देती हैं। आम तौर पर इसे केवल जानवरों की एक रोचक विशेषता माना जाता है, लेकिन विज्ञान के लिए बिल्ली की आंखें एक जटिल और प्रभावी प्राकृतिक ऑप्टिकल सिस्टम का उदाहरण हैं। आंख की पुतली का आकार, कम रोशनी में प्रकाश को उपयोग करने की क्षमता और आंख के भीतर मौजूद टेपेटम ल्यूसिडम (Tapetum Lucidum) जैसी संरचनाएं वैज्ञानिकों को ऐसी कृत्रिम दृष्टि प्रणालियां विकसित करने की प्रेरणा दे रही हैं, जिनका भविष्य में रोबोट, ड्रोन और स्वचालित वाहनों में उपयोग हो सकता है।
हालांकि, यहां एक जरूरी तथ्य स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है। वायरल या सोशल मीडिया सामग्री में अक्सर यह कहा जाता है कि बिल्ली की आंखों की तकनीक से रोबोट कैमरा बना दिया गया है। उपलब्ध वैज्ञानिक शोध के आधार पर अधिक सटीक बात यह है कि बिल्ली की आंख की कुछ प्राकृतिक विशेषताओं से प्रेरित एक कृत्रिम विजन सिस्टम विकसित किया गया है, जिसे रोबोटिक विजन जैसे क्षेत्रों में संभावित उपयोग के लिए देखा जा रहा है। इसे सीधे किसी सामान्य रोबोट के कैमरे में इस्तेमाल होने वाली तैयार तकनीक कहना सही नहीं होगा।
बिल्ली की आंख आखिर इतनी खास क्यों है ?
बिल्लियां मुख्य रूप से कम रोशनी वाले समय—जैसे सुबह और शाम—में सक्रिय रहने के लिए अनुकूलित हुई हैं। उनकी आंखों में कई ऐसी विशेषताएं हैं जो उपलब्ध प्रकाश का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद करती हैं।
सबसे पहले उनकी पुतली (pupil) पर ध्यान देना जरूरी है। तेज रोशनी में बिल्ली की पुतली बहुत पतली, लगभग लंबवत स्लिट जैसी दिखाई दे सकती है। इससे आंख में प्रवेश करने वाले अत्यधिक प्रकाश को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। दूसरी ओर, कम रोशनी में पुतली काफी फैल सकती है, जिससे ज्यादा प्रकाश आंख के अंदर पहुंचता है। 2024 के Science Advances में प्रकाशित शोध ने इसी vertical slit pupil को कृत्रिम विजन सिस्टम की डिजाइन के लिए महत्वपूर्ण प्रेरणा के रूप में इस्तेमाल किया।
बिल्ली की आंख की दूसरी महत्वपूर्ण विशेषता टेपेटम ल्यूसिडम है। यह रेटिना के पीछे स्थित एक परावर्तक संरचना है। आंख में प्रवेश करने वाला जो प्रकाश पहली बार प्रकाश-संवेदी कोशिकाओं द्वारा पूरी तरह अवशोषित नहीं होता, उसका कुछ हिस्सा इस परत से वापस रेटिना की ओर परावर्तित हो सकता है। इसी कारण अंधेरे में किसी प्रकाश स्रोत की ओर देखने पर बिल्ली की आंखों में चमक दिखाई देती है।
Merck Veterinary Manual के अनुसार बिल्लियों की रेटिना में rod cells की संख्या अधिक होती है, जो कम रोशनी में प्रकाश को महसूस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि बिल्ली पूरी तरह अंधेरे में देख सकती है। Cat can see in complete darkness कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है—उसे भी देखने के लिए कुछ प्रकाश की आवश्यकता होती है।
वैज्ञानिकों ने बिल्ली की आंख से क्या सीखा ?
2024 में प्रकाशित एक शोध में वैज्ञानिकों ने बिल्ली की आंख से प्रेरित एक artificial vision system विकसित किया। इस शोध का उद्देश्य ऐसा विजन सिस्टम बनाना था जो अलग-अलग रोशनी और जटिल पृष्ठभूमि में किसी लक्ष्य को पहचानने में बेहतर प्रदर्शन कर सके।
शोधकर्ताओं ने बिल्ली की लंबवत पुतली की अवधारणा से प्रेरित slit-like elliptical aperture का इस्तेमाल किया। यह व्यवस्था आने वाले प्रकाश को नियंत्रित करने में मदद करती है। इसके साथ ही उन्होंने एक hemispherical silicon photodiode array और patterned metal reflector का प्रयोग किया। यह reflector बिल्ली की आंख के tapetum lucidum से प्रेरित था।
शोध में बताए गए प्रयोगों के अनुसार इस कृत्रिम सिस्टम ने तेज रोशनी में अत्यधिक प्रकाश को नियंत्रित करने और कम रोशनी में photosensitivity बढ़ाने की क्षमता दिखाई। शोधकर्ताओं ने यह भी प्रदर्शित किया कि सिस्टम जटिल पृष्ठभूमि में लक्ष्य वस्तु को अलग पहचानने में मदद कर सकता है।
रोबोट के लिए इसका क्या महत्व है ?

आज के कई रोबोट केवल मोटर और सेंसर से काम नहीं करते, बल्कि कैमरा और कंप्यूटर विजन सिस्टम के जरिए अपने आसपास की वस्तुओं को पहचानने की कोशिश करते हैं। स्वचालित वाहन, ड्रोन, निगरानी प्रणाली और मोबाइल रोबोट जैसे क्षेत्रों में वातावरण को सही ढंग से समझना महत्वपूर्ण होता है।
समस्या यह है कि कैमरे के लिए रोशनी हमेशा एक जैसी नहीं रहती। दिन में बहुत तेज प्रकाश कैमरे के सेंसर को प्रभावित कर सकता है, जबकि कम रोशनी में तस्वीर में शोर बढ़ सकता है और वस्तु की पहचान कठिन हो सकती है। इसके अलावा किसी वस्तु की पृष्ठभूमि भी उसके जैसी दिखाई दे तो उसे अलग पहचानना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। शोधकर्ताओं ने बिल्ली की आंख से प्रेरित डिजाइन के जरिए इन्हीं समस्याओं को संबोधित करने का प्रयास किया।
शोधपत्र में इस तकनीक की संभावित उपयोगिता unmanned vehicles, surveillance robots और drones जैसे क्षेत्रों में बताई गई है। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि संभावित उपयोग और व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल होने वाली तकनीक दो अलग बातें हैं। शोध में किसी तकनीक का सफल प्रयोग होना यह साबित नहीं करता कि वह तुरंत बाजार में उपलब्ध रोबोट कैमरों की जगह ले लेगी।

क्या यह पहली बार है जब प्रकृति से कैमरा तकनीक की प्रेरणा ली गई है?
नहीं। वैज्ञानिक लंबे समय से जीव-जंतुओं की आंखों और उनकी देखने की क्षमता से प्रेरणा लेकर artificial vision विकसित कर रहे हैं।
उदाहरण के लिए, KAIST से जुड़े शोध में biologically inspired artificial compound eyes पर काम किया गया है। 2006 में Science में प्रकाशित एक शोध में कीटों की compound eyes से प्रेरित कृत्रिम ऑप्टिकल संरचना विकसित करने का वर्णन किया गया था, जिसका उद्देश्य wide field of view जैसी विशेषताओं को हासिल करना था।
बाद के शोधों में अलग-अलग जीवों की आंखों से प्रेरित कैमरा और विजन सिस्टम विकसित किए गए। KAIST के शोध रिकॉर्ड में arthropod-eye-inspired digital cameras, aquatic vision-inspired cameras, cuttlefish-eye-inspired artificial vision और avian-eye-inspired artificial vision जैसे कार्य दर्ज हैं।
इससे पता चलता है कि biomimicry यानी प्रकृति की संरचनाओं और कार्यप्रणाली से तकनीकी प्रेरणा लेना आधुनिक कैमरा और रोबोटिक विजन अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
तस्वीर में दिखाई देने वाले ‘Cat’s Eyes’ और रोबोट कैमरा एक ही चीज नहीं हैं
दिए गए लेख/तस्वीर में एक और दिलचस्प तथ्य दिखाई देता है—सड़कों पर लगाए जाने वाले reflective road studs, जिन्हें कई देशों में cat’s eyes कहा जाता है।
इनका नाम वास्तव में बिल्ली की आंखों में दिखाई देने वाली चमक से जुड़ा है। ब्रिटेन के Calderdale Museums के अनुसार Percy Shaw ने reflective road studs विकसित किए और 1934 में इसका पेटेंट कराया। उन्हें रात में सड़क पर एक बिल्ली की आंखों से दिखाई देने वाली चमक से प्रेरणा मिली थी।
ब्रिटेन सरकार की सड़क-सुरक्षा संबंधी सामग्री भी बताती है कि reflective road studs, जिन्हें cat’s eyes कहा जाता है, 1934 में उपयोग में आए।
इसलिए सड़क के Cat’s Eyes और आधुनिक feline-eye-inspired artificial camera को एक ही तकनीक समझना गलत होगा। दोनों में प्रकृति से प्रेरणा का विचार समान है, लेकिन उनके उद्देश्य और तकनीकी निर्माण अलग हैं।
आगे क्या संभावनाएं हैं ?
बिल्ली की आंख से प्रेरित artificial vision अभी मुख्य रूप से वैज्ञानिक अनुसंधान का विषय है। भविष्य में ऐसी तकनीकें ऐसे कैमरा सिस्टम बनाने में योगदान दे सकती हैं जो अलग-अलग प्रकाश परिस्थितियों में बेहतर ढंग से काम करें, कम optical aberration रखें और छोटे आकार में अधिक उपयोगी विजन क्षमता प्रदान करें।
खासकर autonomous robots और drones के लिए ऐसा सिस्टम उपयोगी हो सकता है, जहां कैमरे को बदलती रोशनी और जटिल वातावरण में लगातार जानकारी देनी होती है। हालांकि वास्तविक दुनिया में बड़े पैमाने पर उपयोग से पहले विश्वसनीयता, लागत, निर्माण की जटिलता, ऊर्जा खपत और अलग-अलग परिस्थितियों में प्रदर्शन जैसे कई पहलुओं का परीक्षण जरूरी होगा।

बिल्ली की आंख केवल अंधेरे में चमकने वाली प्राकृतिक संरचना नहीं है, बल्कि यह प्रकाश को नियंत्रित और उपयोग करने की एक अत्यंत रोचक जैविक व्यवस्था है। Vertical slit pupil और tapetum lucidum जैसी विशेषताओं ने वैज्ञानिकों को artificial vision की नई डिजाइन सोचने की प्रेरणा दी है। 2024 के शोध में बिल्ली की आंख से प्रेरित कृत्रिम विजन सिस्टम ने तेज और कम रोशनी दोनों परिस्थितियों में बेहतर imaging तथा जटिल पृष्ठभूमि से लक्ष्य पहचानने की क्षमता प्रदर्शित की।
लेकिन इसे रोबोट की आंख तैयार हो गई या रोबोट अब बिल्ली की तरह देख सकता है कहना अतिशयोक्ति होगा। सही निष्कर्ष यह है कि प्रकृति की आंखों की कार्यप्रणाली को समझकर वैज्ञानिक अगली पीढ़ी के कैमरा और रोबोटिक विजन सिस्टम के लिए नई तकनीकों का विकास कर रहे हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध वैज्ञानिक शोध, विश्वविद्यालय/वैज्ञानिक संस्थानों के रिकॉर्ड और आधिकारिक/विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। इसमें शोध की संभावित तकनीकी उपयोगिता को वर्तमान व्यावसायिक उत्पाद या व्यापक रूप से लागू हो चुकी तकनीक के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।



