
यूरेनियम (Uranium) एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला रेडियोधर्मी रासायनिक तत्व है, जिसका रासायनिक प्रतीक U और परमाणु क्रमांक 92 है। यह आवर्त सारणी के ऐक्टिनाइड समूह का भारी धातु तत्व है। यूरेनियम का सबसे महत्वपूर्ण आधुनिक उपयोग परमाणु ऊर्जा के लिए ईंधन के रूप में होता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि जमीन से निकला हर यूरेनियम सीधे परमाणु रिएक्टर में इस्तेमाल किया जा सकता है। खनन से लेकर अयस्क के प्रसंस्करण, ईंधन निर्माण और रिएक्टर में उपयोग तक इसके पीछे एक पूरा न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल होता है।
यूरेनियम की मूल पहचान
प्राकृतिक यूरेनियम मुख्य रूप से तीन समस्थानिकों—यूरेनियम-238 (U-238), यूरेनियम-235 (U-235) और बहुत कम मात्रा में यूरेनियम-234 (U-234)—का मिश्रण होता है। IAEA के तकनीकी आंकड़ों के अनुसार प्राकृतिक यूरेनियम में लगभग 99.2745% U-238, 0.720% U-235 और 0.0055% U-234 होता है।
इनमें U-235 विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विखंडन (fission) की श्रृंखला प्रतिक्रिया को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दूसरी ओर U-238 प्राकृतिक यूरेनियम का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसलिए प्राकृतिक यूरेनियम को केवल “U-235” समझना वैज्ञानिक रूप से गलत होगा।
यूरेनियम प्राकृतिक रूप से चट्टानों और खनिजों में पाया जाता है। इसका अस्तित्व केवल कुछ विशेष देशों तक सीमित नहीं है; यह पृथ्वी की पपड़ी में अलग-अलग मात्रा में मौजूद है।
यूरेनियम से बिजली कैसे बनती है ?
परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में यूरेनियम का उपयोग मुख्यतः नाभिकीय विखंडन (nuclear fission) के माध्यम से ऊर्जा पैदा करने के लिए किया जाता है।
सरल शब्दों में, उपयुक्त परिस्थितियों में यूरेनियम के कुछ परमाणु नाभिक टूट सकते हैं। इस प्रक्रिया में ऊर्जा और अन्य कण निकलते हैं, जो आगे और विखंडन की प्रक्रिया में योगदान कर सकते हैं। नियंत्रित श्रृंखला प्रतिक्रिया से बड़ी मात्रा में ऊष्मा पैदा होती है। यह ऊष्मा पानी को गर्म करके भाप बनाने और फिर टर्बाइन-जनरेटर के माध्यम से बिजली पैदा करने में इस्तेमाल की जाती है।
इसलिए परमाणु बिजली संयंत्र में यूरेनियम स्वयं “बिजली” नहीं बनाता; उसके नाभिकीय विखंडन से प्राप्त ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।

प्राकृतिक, संवर्धित और डिप्लीटेड यूरेनियम
यूरेनियम के संदर्भ में Natural Uranium, Enriched Uranium और Depleted Uranium जैसे शब्द अक्सर सुनने को मिलते हैं।
Natural Uranium वह यूरेनियम है जिसमें समस्थानिकों का प्राकृतिक अनुपात बना रहता है। इसमें U-235 लगभग 0.72% होता है।
Enriched Uranium में U-235 का अनुपात प्राकृतिक यूरेनियम की तुलना में बढ़ाया जाता है। IAEA के अनुसार enrichment प्रक्रिया में U-235 का अनुपात बढ़ाया जाता है।
Depleted Uranium में U-235 का अनुपात प्राकृतिक यूरेनियम की तुलना में कम होता है। IAEA की परिभाषा भी इसे प्राकृतिक यूरेनियम से कम U-235 वाला यूरेनियम बताती है।
यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि अलग-अलग प्रकार के रिएक्टर और परमाणु ईंधन प्रणालियां अलग-अलग ईंधन संरचनाओं का उपयोग करती हैं। उदाहरण के लिए, कुछ रिएक्टर प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग कर सकते हैं, जबकि अन्य प्रणालियों में संवर्धित यूरेनियम की आवश्यकता होती है।
यूरेनियम खदान से परमाणु ईंधन तक
जमीन से निकलने वाला पदार्थ सीधे रिएक्टर का ईंधन नहीं होता। पहले यूरेनियम अयस्क का खनन किया जाता है और फिर उसे प्रसंस्करण संयंत्र में भेजा जाता है।
भारत में UCIL की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, झारखंड की जादूगोड़ा मिल में विभिन्न खदानों से प्राप्त यूरेनियम अयस्क का प्रसंस्करण किया जाता है। वहां हाइड्रो-मेटलर्जिकल प्रक्रिया के माध्यम से यूरेनियम को अयस्क से अलग कर सांद्रित किया जाता है। इससे येलोकेक के रूप में जाना जाने वाला यूरेनियम सांद्रण प्राप्त होता है। इसके बाद आगे की ईंधन-निर्माण प्रक्रिया के लिए इसे भेजा जाता है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि “यूरेनियम की खोज” और “परमाणु रिएक्टर के लिए तैयार ईंधन” एक ही चीज नहीं हैं। इनके बीच कई औद्योगिक और तकनीकी चरण होते हैं।

भारत में यूरेनियम
भारत में यूरेनियम संसाधनों की खोज और विकास में Atomic Minerals Directorate for Exploration and Research (AMD) तथा परमाणु ऊर्जा विभाग से जुड़े संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत सरकार के Department of Atomic Energy के जनवरी 2026 के आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, देश का कुल in-situ uranium resource लगभग 4,39,800 टन तक पहुंच गया था। यह आंकड़ा in-situ resource का है; इसे सीधे खनन योग्य, आर्थिक रूप से व्यवहार्य या तत्काल उपलब्ध ईंधन की मात्रा समझना उचित नहीं है।
भारत में यूरेनियम खनन का सबसे प्रसिद्ध क्षेत्र झारखंड का सिंहभूम क्षेत्र है। UCIL के अनुसार, जादूगोड़ा में खनन की शुरुआत 1967 में हुई थी और यह देश की पहली यूरेनियम खदान थी।
UCIL वर्तमान में झारखंड में जादूगोड़ा, भाटिन, तुरामडीह, बागजाता, नरवापहाड़, बांदुहुरांग और मोहुलडीह जैसी खदानों तथा संबंधित प्रसंस्करण सुविधाओं का संचालन करता है। इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश के तुम्मलापल्ले में भी यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण गतिविधियां संचालित होती हैं।
भारत की परमाणु ऊर्जा रणनीति में यूरेनियम का महत्व
भारत की परमाणु ऊर्जा नीति केवल वर्तमान यूरेनियम संसाधनों तक सीमित नहीं है। देश ने लंबे समय से एक तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित किया है, जिसमें यूरेनियम और बाद के चरणों में थोरियम संसाधनों की भूमिका निर्धारित की गई है।
Department of Atomic Energy के अनुसार, भारत के परमाणु कार्यक्रम में घरेलू यूरेनियम की उपलब्धता और भविष्य में थोरियम संसाधनों के उपयोग को महत्वपूर्ण माना जाता है।
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यूरेनियम और थोरियम एक ही तत्व नहीं हैं। थोरियम स्वयं सामान्य अर्थ में आज के अधिकांश परमाणु रिएक्टरों का सीधे इस्तेमाल होने वाला पारंपरिक ईंधन नहीं है; भारत के दीर्घकालिक कार्यक्रम में थोरियम से उपयोगी परमाणु ईंधन चक्र विकसित करने की योजना शामिल है।
क्या यूरेनियम बहुत खतरनाक होता है ?
यूरेनियम रेडियोधर्मी तत्व है, इसलिए इसके साथ काम करने के लिए नियंत्रित परिस्थितियों, सुरक्षा मानकों और नियामकीय निगरानी की आवश्यकता होती है। लेकिन “रेडियोधर्मी” होने का अर्थ यह नहीं है कि यूरेनियम की कोई भी मात्रा अपने आप तत्काल घातक होती है।
जोखिम कई बातों पर निर्भर करता है—पदार्थ का रूप, मात्रा, exposure का तरीका, exposure की अवधि और शरीर में उसके प्रवेश की संभावना आदि।
भारत में परमाणु और विकिरण सुरक्षा से संबंधित नियमन में Atomic Energy Regulatory Board (AERB) की महत्वपूर्ण भूमिका है। AERB का आधिकारिक मिशन यह सुनिश्चित करना है कि भारत में आयनीकरण विकिरण और परमाणु ऊर्जा के उपयोग से लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को अनुचित जोखिम न हो।
AERB विभिन्न परमाणु और विकिरण सुविधाओं के लिए सुरक्षा नीतियां, कोड, गाइड और मानक विकसित करता है तथा संबंधित सुविधाओं के लाइसेंस और नियामकीय नियंत्रण में भूमिका निभाता है।

यूरेनियम और परमाणु हथियार—दोनों को एक जैसा समझना गलत है
यूरेनियम का नाम सुनते ही अक्सर परमाणु हथियारों का विचार आता है, लेकिन वैज्ञानिक और औद्योगिक दृष्टि से परमाणु ऊर्जा और परमाणु हथियार एक ही उपयोग नहीं हैं।
नाभिकीय ऊर्जा संयंत्रों में यूरेनियम का उपयोग नियंत्रित परिस्थितियों में ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाता है। दूसरी ओर हथियारों के लिए आवश्यक सामग्री और प्रक्रियाएं अलग तथा अत्यधिक नियंत्रित होती हैं।
इसलिए “यूरेनियम है, इसलिए यह परमाणु बम है” जैसी धारणा तथ्यात्मक रूप से गलत है। यूरेनियम का सबसे व्यापक नागरिक उपयोग परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए ईंधन के रूप में होता है।
यूरेनियम की अर्थव्यवस्था और वैश्विक महत्व
यूरेनियम का महत्व केवल विज्ञान तक सीमित नहीं है। परमाणु ऊर्जा वाले देशों के लिए विश्वसनीय यूरेनियम आपूर्ति परमाणु ईंधन सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी कारण यूरेनियम खनन, संसाधन आकलन, प्रसंस्करण और ईंधन आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यवस्था का हिस्सा हैं।
USGS का Mineral Commodity Summaries 2026 दुनिया भर के खनिज संसाधनों और उत्पादन से संबंधित महत्वपूर्ण सरकारी आंकड़ों का वार्षिक स्रोत है। यूरेनियम सहित विभिन्न खनिजों के वैश्विक उत्पादन और संसाधनों का आकलन ऐसे ही आधिकारिक डेटासेट के माध्यम से किया जाता है।
यूरेनियम एक प्राकृतिक रेडियोधर्मी तत्व है जिसका आधुनिक दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण उपयोग परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में है। प्राकृतिक यूरेनियम में मुख्यतः U-238 होता है, जबकि लगभग 0.72% U-235 होता है। इसी U-235 की नाभिकीय विशेषताओं के कारण यूरेनियम परमाणु ईंधन चक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है।
भारत में यूरेनियम की खोज, खनन, प्रसंस्करण और परमाणु ईंधन उत्पादन एक संगठित परमाणु ईंधन चक्र का हिस्सा है। झारखंड का सिंहभूम क्षेत्र और जादूगोड़ा इस क्षेत्र में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, जबकि देश के अन्य राज्यों में भी यूरेनियम संसाधनों की पहचान और विकास किया जा रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यूरेनियम के बारे में जानकारी देते समय प्राकृतिक यूरेनियम, संवर्धित यूरेनियम, डिप्लीटेड यूरेनियम, परमाणु ईंधन और परमाणु हथियारों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। आधिकारिक स्रोतों के आधार पर देखा जाए तो यूरेनियम एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और ऊर्जा-संसाधन है, लेकिन इसके उपयोग और प्रबंधन के साथ कड़े सुरक्षा एवं नियामकीय मानक भी जुड़े हुए हैं। भारत में इन सुरक्षा पहलुओं के नियमन में AERB की महत्वपूर्ण भूमिका है।
स्रोत: International Atomic Energy Agency (IAEA), Department of Atomic Energy (Government of India), Uranium Corporation of India Limited (UCIL), Atomic Energy Regulatory Board (AERB) और U.S. Geological Survey (USGS) के आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत।
