Thursday, 15 October 202602:10 IST

18 साल से कम उम्र वालों के सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से क्या बदलेगा, जानिए पूरी सच्चाई

Updated: 01 Oct 2026, 16:29 IST · By Yk Pasha · 1 min read
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सोशल मीडिया आज बच्चों और किशोरों की रोजमर्रा की डिजिटल जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, मनोरंजन, दोस्तों से बातचीत और जानकारी हासिल करने के लिए बच्चे इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इसके साथ ऑनलाइन सुरक्षा, निजी डेटा, साइबरबुलिंग, अनुचित सामग्री और बच्चों की डिजिटल गोपनीयता जैसे सवाल भी लगातार सामने आते रहे हैं।

इसी पृष्ठभूमि में सितंबर 2026 में Supreme Court of India में नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई हुई। इस सुनवाई के बाद कई जगह यह खबर सामने आई कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक लगने वाली है। हालांकि, उपलब्ध ताजा जानकारी को देखते हुए इस दावे को सीधे तौर पर 18 साल से कम उम्र वालों के सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू हो गया कहना सही नहीं होगा।

असल में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मौजूदा कानूनी व्यवस्था के तहत इस मुद्दे पर प्रभावी नियम बनाने/विचार करने को कहा है। वहीं, 30 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार से जुड़े सूत्रों ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि सरकार ने अंडर-18 सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का फैसला कर लिया है।

मामला आखिर शुरू कैसे हुआ ?

यह मामला Just Rights for Children Alliance नामक संगठन की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने 10 सितंबर 2026 को इस याचिका पर केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों से जवाब मांगा था। याचिका में बच्चों को सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र रूप से अकाउंट बनाने से रोकने तथा उनकी सुरक्षा के लिए प्रभावी age-verification और parental-consent व्यवस्था विकसित करने की मांग की गई थी।

याचिका में मूल सवाल यह उठाया गया कि भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को कानून के तहत नाबालिग माना जाता है, लेकिन कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर न्यूनतम आयु सीमा इससे काफी कम है। ऐसे में बच्चों द्वारा प्लेटफॉर्म की Terms of Service स्वीकार करके अकाउंट बनाने की कानूनी स्थिति पर सवाल उठाया गया।

18 साल की उम्र का मुद्दा क्यों आया ?

इस बहस का एक महत्वपूर्ण आधार Indian Contract Act, 1872 है। इसके Section 11 के अनुसार, अनुबंध करने के लिए व्यक्ति का अपने ऊपर लागू कानून के अनुसार major होना जरूरी है। India Code पर उपलब्ध कानून में यही प्रावधान दर्ज है।

सोशल मीडिया अकाउंट बनाते समय उपयोगकर्ता को आम तौर पर प्लेटफॉर्म की Terms of Service स्वीकार करनी होती हैं। याचिका में इसी आधार पर तर्क दिया गया कि नाबालिगों द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ ऐसे समझौते करने की व्यवस्था पर स्पष्ट कानूनी सुरक्षा होनी चाहिए। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि Section 11 का अस्तित्व अपने-आप में यह घोषित नहीं करता कि भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के हर व्यक्ति का सोशल मीडिया इस्तेमाल पहले से प्रतिबंधित है।

यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुख्य प्रश्न मौजूदा कानून और डिजिटल प्लेटफॉर्म की व्यवस्था के बीच मौजूद अंतर को लेकर उठा है।

क्या सुप्रीम कोर्ट ने 18 साल से कम उम्र वालों के अकाउंट बंद करने का आदेश दिया ?

अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा।

28 सितंबर 2026 की सुनवाई के बाद कई रिपोर्टों में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सोशल मीडिया कंपनियों को नाबालिगों के अकाउंट खोलने से रोकने के लिए वैधानिक व्यवस्था पर विचार करने को कहा। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को भारतीय कानून के अनुरूप काम करना चाहिए।

लेकिन इसके बाद स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण सामने आया। 30 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार से जुड़े सूत्रों ने उन खबरों को खारिज किया जिनमें कहा गया था कि सरकार अंडर-18 लोगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है। इसका अर्थ है कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सरकार द्वारा किसी अंतिम प्रतिबंध को लागू करना—दो अलग-अलग बातें हैं।

इसलिए फिलहाल “18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक लग गई” जैसी भाषा तथ्यात्मक रूप से भ्रामक हो सकती है।

क्या बच्चों के लिए पहले से डेटा सुरक्षा कानून मौजूद है ?

हां। भारत में बच्चों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए Digital Personal Data Protection Act, 2023 (DPDP Act) में विशेष प्रावधान हैं।

इस कानून की Section 9 के अनुसार, किसी बच्चे के personal data को process करने से पहले data fiduciary को माता-पिता या lawful guardian की verifiable consent प्राप्त करनी होती है। कानून बच्चों के डेटा के संबंध में tracking, behavioural monitoring और targeted advertising पर भी विशेष प्रतिबंध लगाता है, कुछ निर्धारित अपवादों के अधीन।

MeitY ने Digital Personal Data Protection Rules, 2025 भी अधिसूचित किए हैं। मंत्रालय के अनुसार इन नियमों में कानून को लागू करने के लिए operational framework दिया गया है और बच्चों के डेटा से संबंधित parental consent जैसी व्यवस्थाओं को लागू करने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है—बच्चे के personal data को process करने के लिए parental consent की आवश्यकता और 18 साल से कम उम्र के बच्चे के सोशल मीडिया अकाउंट पर पूर्ण प्रतिबंध, एक ही चीज नहीं हैं।

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की मौजूदा व्यवस्था क्या है ?

कई अंतरराष्ट्रीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लंबे समय से अपने नियमों में न्यूनतम उम्र निर्धारित करते हैं। उदाहरण के तौर पर Meta ने 2026 में बताया कि Instagram और Facebook पर सामान्यतः न्यूनतम आयु 13 वर्ष है और कंपनी कम उम्र के उपयोगकर्ताओं की पहचान तथा उन्हें हटाने के लिए age-assurance तकनीक पर काम कर रही है।

यही अंतर भारत में चल रही कानूनी बहस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सवाल यह है कि क्या भारत में केवल प्लेटफॉर्म की self-declared age व्यवस्था पर्याप्त है या फिर भारतीय कानून के अनुरूप अधिक प्रभावी age verification और parental authorization की जरूरत है।

क्या माता-पिता की निगरानी बढ़ सकती है ?

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर याचिका में बच्चों की डिजिटल गतिविधियों के लिए अधिक मजबूत parental-control व्यवस्था की बात भी सामने आई है। याचिका में यह तर्क दिया गया कि बच्चों को पूरी तरह डिजिटल दुनिया से अलग करने के बजाय उनकी पहुंच को सुरक्षित और age-appropriate तरीके से व्यवस्थित किया जा सकता है।

संभावित व्यवस्था में verified parental consent, age verification, parental control और बच्चों के लिए उपयुक्त डिजिटल सामग्री जैसे विकल्पों पर चर्चा हो सकती है। लेकिन इनमें से कौन-सा मॉडल अपनाया जाएगा, यह सरकार द्वारा बनाए जाने वाले नियमों और आगे की न्यायिक कार्यवाही पर निर्भर करेगा।

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा क्यों महत्वपूर्ण है ?

बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच को लेकर चिंता केवल अकाउंट बनाने तक सीमित नहीं है। ऑनलाइन grooming, cyberbullying, inappropriate content, privacy violations और personal-data misuse जैसे जोखिमों पर भी सरकार और न्यायपालिका चर्चा कर रहे हैं।

मार्च 2026 में National Human Rights Commission ने भी बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर एक Open House Discussion आयोजित की थी। इसमें बच्चों की सुरक्षा, harmful content, social-media exposure और regulation बनाम complete ban जैसे विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। NHRC ने संतुलित और evidence-based approach की आवश्यकता पर जोर दिया था।

आगे क्या हो सकता है ?

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के सभी लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट पर कोई नया सामान्य प्रतिबंध लागू हो गया है—ऐसा निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के सामने कानूनी और नियामकीय व्यवस्था को स्पष्ट करने का मुद्दा रखा है। सरकार की ओर से बाद में आई जानकारी ने भी उन रिपोर्टों से दूरी बनाई है जिनमें तत्काल अंडर-18 प्रतिबंध की बात कही गई थी।

आगे सरकार यदि IT Rules में कोई बदलाव प्रस्तावित करती है तो उसकी आधिकारिक अधिसूचना मसौदा नियम और लागू होने की तारीख देखना जरूरी होगा। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्यवाही से भी स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।

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सितंबर 2026 की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई ने भारत में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल और डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस को सामने ला दिया है। मुद्दा केवल यह नहीं है कि बच्चे सोशल मीडिया इस्तेमाल करें या नहीं, बल्कि यह भी है कि उनकी उम्र कैसे सत्यापित हो, उनका व्यक्तिगत डेटा कैसे सुरक्षित रहे, माता-पिता की सहमति किस तरह ली जाए और सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी क्या हो।

इस समय सबसे तथ्यात्मक निष्कर्ष यही है कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नाबालिगों के सोशल मीडिया अकाउंट और उनसे जुड़े कानूनी safeguards पर कार्रवाई/विचार करने को कहा है, लेकिन 18 वर्ष से कम उम्र वालों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर देशव्यापी प्रतिबंध लागू होने की घोषणा नहीं हुई है। केंद्र सरकार द्वारा 30 सितंबर को ऐसी योजना की खबरों को खारिज किए जाने के कारण इस विषय में आगे की आधिकारिक अधिसूचना और न्यायालय की कार्यवाही को देखना महत्वपूर्ण होगा।

तथ्य-जांच नोट: इस लेख में 18 साल से कम उम्र वालों के सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक को लागू कानून के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है, क्योंकि उपलब्ध ताजा सरकारी स्पष्टीकरण के अनुसार ऐसा प्रतिबंध घोषित नहीं किया गया है। भविष्य में नियम बदलने पर स्थिति अलग हो सकती है।

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