
NDTV Profit के अनुसार, सिगरेट कंपनियों ने कुछ चुनिंदा पॉकेट-पैक ब्रैंड्स की कीमतें बढ़ा दी हैं। इनमें कुछ सिगरेट की कीमतें ₹70 से बढ़कर ₹85 हो गई हैं तो कुछ की ₹70 से बढ़कर ₹79 हो गई हैं। कीमतों में यह ताज़ा बढ़ोतरी सरकार द्वारा सिगरेट पर एक्साइज़ ड्यूटी 30-40% बढ़ाए जाने के कुछ महीनों बाद हुई है।
अगर आप सिगरेट पीने वालों में से हैं, तो यह खबर आपके बजट को सीधे प्रभावित करेगी। देश में एक बार फिर सिगरेट की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। खासकर उन पॉकेट-पैक सिगरेट्स के दाम बढ़ाए गए हैं, जो आमतौर पर अधिक बिकती हैं। NDTV Profit के अनुसार, सिगरेट कंपनियों ने अपने कुछ चुनिंदा ब्रांड्स के दाम बढ़ा दिए हैं। आइये, इस ब्लॉग में जानते हैं कि किन सिगरेट्स के दाम बढ़े हैं, कितनी बढ़ोतरी हुई है और इसके पीछे क्या कारण है।
⚫ किन सिगरेट्स के दाम बढ़े हैं और कितने? (Price Hike Details)
रिपोर्ट के मुताबिक, यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से पॉकेट-फ्रेंडली पैक्स (जिनमें आमतौर पर 10 या उससे कम सिगरेट होती हैं) पर हुई है।
👉 केस 1: कुछ सिगरेट ब्रांड्स के दाम 70 रुपये से बढ़ाकर 85 रुपये कर दिए गए हैं। यानी करीब 21% की बढ़ोतरी।
👉 केस 2: वहीं, कुछ अन्य ब्रैंड्स के दाम 70 रुपये से बढ़ाकर 79 रुपये किए गए हैं। यानी करीब 13% की बढ़ोतरी।
गौरतलब है कि फिलहाल यह बढ़ोतरी कुछ चुनिंदा पॉकेट-पैक ब्रैंड्स पर ही लागू हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इसका असर दूसरे ब्रांड्स पर भी देखने को मिल सकता है।
⚫ आखिर क्यों बढ़ाई गई कीमतें? (Reason Behind the Hike)
इस कीमत बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण सरकार द्वारा लगाया गया टैक्स है। रिपोर्ट के अनुसारः
👉 सरकार ने कुछ महीने पहले ही सिगरेट पर एक्साइज़ ड्यूटी (Excise Duty) में 30-40% तक का इज़ाफा किया था।
👉 एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ने का सीधा मतलब यह है कि सिगरेट बनाने वाली कंपनियों को सरकार को अधिक टैक्स चुकाना पड़ेगा।
👉 इस अतिरिक्त बोझ को कंपनियों ने अंतिम ग्राहकों (यानी धूम्रपान करने वालों) पर डालते हुए सिगरेट के दाम बढ़ा दिए हैं।
⚫ उपभोक्ताओं पर क्या प्रभाव? (Impact on Consumers)
👉 बढ़ा हुआ खर्च: जो लोग रोजाना सिगरेट पीते हैं, उनके
मासिक खर्च में काफी इजाफा हो जाएगा। अगर कोई व्यक्ति दिन में एक पैक खरीदता था (70 रुपये वाला), तो अब उसे 85 रुपये देने होंगे। एक महीने में यह 450 रुपये का अतिरिक्त बोझ बन जाता है।
👉 गठरी पर असरः पॉकेट-पैक्स गरीब या मध्यम वर्ग के
लोगों के लिए एक आसान विकल्प थे, जिन पर अब महंगाई की मार पड़ेगी।
👉 स्मोकिंग छोड़ने का मौकाः स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार,
कीमतें बढ़ना अक्सर एक निवारक (deterrent) का काम करता है। बढ़ी हुई कीमतें कुछ लोगों को सिगरेट छोड़ने या कम करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
⚫ सरकार का नजरिया और स्वास्थ्य पर प्रभाव (Government’s View & Health Impact)
👉 टैक्स बढ़ाने का उद्देश्य: सरकार का कहना है कि
एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ाने का उद्देश्य लोगों को तम्बाकू उत्पादों से दूर रखना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी टैक्स बढ़ाकर धूम्रपान कम करने की वकालत करता है।
👉 स्वास्थ्य जोखिमः सिगरेट कैंसर (Cancer), हार्ट अटैक
(Heart Attack), ब्लड प्रेशर (High BP) और फेफड़ों की बीमारियों (Lungs disease) का प्रमुख कारण है। किफायती दाम हटने से उम्मीद है कि युवाओं और कम आय वर्ग में धूम्रपान की शुरुआत कम होगी।
सिगरेट का यह दाम बढ़ोतरी का दौर आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहा है। जहां एक तरफ टैक्स बढ़ाने से सरकार को राजस्व मिलेगा और लोगों की सेहत सुधारने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ पुराने धूम्रपान करने वालों के सामने मुश्किलें बढ़ गई हैं। अगर आप भी सिगरेट पीते हैं, तो हो सकता है कि यह आपके लिए “छोड़ने का सुनहरा मौका” हो। महंगी सिगरेट से बेहतर है कि उस पैसे को सेहत पर खर्च करें।

क्या आपको लगता है कि कीमतें बढ़ने से धूम्रपान करने वालों की संख्या कम होगी? नीचे कमेंट में अपनी राय ज़रूर दें।
स्रोत: यह जानकारी NDTV Profit की हालिया रिपोर्ट पर आधारित है।