Saturday, 12 September 202619:11 IST

BRICS Summit 2026: पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान का थामा हाथ, पुतिन और रामाफोसा भी साथ दिखे—तस्वीर के पीछे क्या है पूरी कहानी?

Updated: 12 Sep 2026, 09:18 IST · By Yk Pasha · 1 min read
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नई दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 के बीच एक तस्वीर सोशल मीडिया और न्यूज प्लेटफॉर्म पर तेजी से चर्चा में है। तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा एक साथ चलते दिखाई दे रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान के हाथ पकड़कर साथ चलने वाले दृश्य को विशेष रूप से प्रमुखता दी जा रही है।

लेकिन इस तस्वीर को केवल एक वायरल फोटो के रूप में देखने के बजाय इसके कूटनीतिक और BRICS से जुड़े संदर्भ को समझना जरूरी है।

BRICS Summit 2026 में क्या हुआ?
भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 18वां BRICS Leaders’ Summit 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है। भारत की 2026 की अध्यक्षता का विषय है—“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण।

शिखर सम्मेलन से पहले 11 सितंबर को BRICS Business Forum से जुड़े कार्यक्रमों में कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी रही। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी, पुतिन, पेजेश्कियान और रामाफोसा सहित नेताओं के साथ चलते हुए दृश्य सामने आए।

पीएम मोदी और पेजेश्कियान की हाथ थामे तस्वीर क्यों महत्वपूर्ण है?
तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान साथ चलते हुए नजर आते हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह दृश्य BRICS Business Forum 2026 के दौरान सामने आया था। इसे विभिन्न मीडिया रिपोर्टों ने BRICS के भीतर सहयोग और एकजुटता के प्रतीकात्मक दृश्य के रूप में प्रस्तुत किया है।

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है: सिर्फ हाथ पकड़कर चलने वाली तस्वीर को किसी नए सैन्य या औपचारिक राजनीतिक गठबंधन का प्रमाण नहीं माना जा सकता। यह एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान नेताओं के साथ चलने का दृश्य है। इसके वास्तविक कूटनीतिक महत्व को समझने के लिए नेताओं की आधिकारिक बातचीत और जारी बयानों को देखना अधिक उचित है।

मोदी-पेजेश्कियान की आधिकारिक बैठक में क्या चर्चा हुई?
प्रधानमंत्री मोदी ने 11 सितंबर 2026 को BRICS Summit के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से द्विपक्षीय मुलाकात की। भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS से जुड़े कार्यक्रमों में ईरान की निरंतर उच्च-स्तरीय भागीदारी की सराहना की और Global South के देशों के बीच resilience, innovation, cooperation और sustainability को बढ़ावा देने में BRICS की संभावनाओं पर जोर दिया।

दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया। भारत ने अपने पुराने और लगातार दोहराए जाने वाले रुख को दोहराया कि विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए होना चाहिए।

बैठक में समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता, व्यापारिक आवागमन तथा समुद्री यात्रियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया गया।

क्या पेजेश्कियान की यह भारत की पहली यात्रा है?
हां। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद 11 सितंबर को कहा कि राष्ट्रपति पेजेश्कियान की यह भारत की पहली यात्रा है। हालांकि दोनों नेताओं की मुलाकात इससे पहले भी हो चुकी है।

भारत के विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार, मोदी और पेजेश्कियान की पहली मुलाकात अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में आयोजित 16वें BRICS Summit के दौरान हुई थी। इसके बाद दोनों नेताओं ने अगस्त 2026 में बिश्केक में SCO Summit के दौरान भी मुलाकात की।

इसलिए 2026 की नई दिल्ली यात्रा को भारत-ईरान संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय संपर्क के रूप में देखा जा सकता है।

पश्चिम एशिया का युद्ध बना BRICS के लिए बड़ी चुनौती

इस वर्ष BRICS Summit ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में गंभीर सैन्य और राजनीतिक तनाव बना हुआ है। ईरान और अमेरिका-इजरायल संघर्ष का प्रभाव क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी पड़ रहा है।

इसी कारण ईरान की BRICS में मौजूदगी इस बार विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गई है। AP की रिपोर्ट के अनुसार, BRICS में अब 11 पूर्ण सदस्य देश हैं और समूह में अलग-अलग देशों के क्षेत्रीय हित तथा विदेश नीति प्राथमिकताएं काफी भिन्न हैं।

इसलिए BRICS की एकता केवल तस्वीरों में दिखाई देने वाले सौहार्द से नहीं, बल्कि कठिन अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच कितनी व्यावहारिक सहमति बनती है, इससे भी तय होगी।

BRICS आखिर है क्या?
BRICS मूल रूप से Brazil, Russia, India, China और South Africa के नामों से बना समूह है। बाद में इसका विस्तार हुआ और इसमें नए सदस्य शामिल हुए।

2026 में समूह का विस्तार पहले की तुलना में काफी बड़ा हो चुका है। वर्तमान पूर्ण सदस्य देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं।

BRICS का उद्देश्य केवल राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करना नहीं है। इसके एजेंडे में व्यापार, निवेश, वित्तीय सहयोग, तकनीक, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक शासन में सुधार जैसे विषय भी शामिल हैं।

भारत के लिए 2026 का BRICS Summit क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह सम्मेलन नई दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर है। भारत एक तरफ रूस के साथ अपने रणनीतिक और ऊर्जा संबंध बनाए हुए है, दूसरी तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ भी उसके महत्वपूर्ण आर्थिक एवं रणनीतिक संबंध हैं।

इसी तरह चीन के साथ भारत के संबंधों में भी प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों मौजूद हैं।

ऐसे वातावरण में BRICS भारत को विभिन्न शक्तियों के साथ एक ही बहुपक्षीय मंच पर बातचीत करने का अवसर देता है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ 11 सितंबर की मोदी की बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों ने पश्चिम एशिया और Black Sea क्षेत्र के संघर्षों के कारण समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भी चर्चा की।

क्या मोदी-पेजेश्कियान की तस्वीर का मतलब भारत ईरान के पक्ष में खड़ा हो गया?

ऐसा निष्कर्ष निकालना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।

एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हाथ पकड़कर साथ चलने की तस्वीर को भारत की किसी औपचारिक सैन्य या युद्ध-संबंधी प्रतिबद्धता के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।

भारत का आधिकारिक रुख पश्चिम एशिया के संकटों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर देने का है। मोदी-पेजेश्कियान की बैठक में भी भारत ने शांति, स्थिरता, समुद्री व्यापार और navigation की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर जोर दिया।

इसलिए तस्वीर को भारत-ईरान मैत्री और उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संपर्क के दृश्य के रूप में देखना अधिक उचित है, न कि किसी नए सैन्य गठबंधन के प्रमाण के रूप में।

BRICS की “एकजुटता” कितनी मजबूत है?
वायरल तस्वीर BRICS की एकता का एक सकारात्मक दृश्य जरूर दिखाती है, लेकिन समूह के सामने वास्तविक चुनौतियां भी हैं।

BRICS में ऐसे देश शामिल हैं जिनके आपसी संबंध हमेशा एक जैसे नहीं रहे हैं। उदाहरण के लिए भारत और चीन के बीच सीमा तथा व्यापार से जुड़े मतभेद हैं। वहीं ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे देशों के क्षेत्रीय हित भी हमेशा समान नहीं होते।

इसीलिए 2026 का Summit BRICS के लिए केवल फोटो अवसर नहीं बल्कि व्यावहारिक सहयोग की परीक्षा भी है।

भारत की प्राथमिकताओं में व्यापार, तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था, AI, MSMEs, भुगतान प्रणालियों और resilient supply chains जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं।

वायरल तस्वीर से जुड़ा तथ्यात्मक निष्कर्ष
वायरल तस्वीर वास्तविक BRICS Business Forum 2026 के कार्यक्रम से संबंधित है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा सहित नेता साथ चलते दिखाई दिए। रिपोर्टों में मोदी और पेजेश्कियान के हाथ पकड़कर चलने वाले दृश्य की पुष्टि की गई है।

लेकिन तस्वीर से यह निष्कर्ष निकालना कि भारत ने ईरान के साथ किसी नए सैन्य गठबंधन की घोषणा कर दी है या BRICS ने किसी युद्ध में सामूहिक रूप से किसी एक पक्ष का समर्थन कर दिया है, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी से समर्थित नहीं है।

भारत की आधिकारिक बातचीत का मुख्य संदेश संवाद, कूटनीति, क्षेत्रीय शांति, समुद्री व्यापार की सुरक्षा और BRICS के भीतर सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित रहा है।

BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की हाथ थामे तस्वीर ने निश्चित रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। यह तस्वीर भारत, ईरान, रूस और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं की एक साथ मौजूदगी और BRICS के बहुपक्षीय चरित्र को दिखाती है।

लेकिन तस्वीर का वास्तविक महत्व केवल हाथ पकड़ने में नहीं, बल्कि उसके पीछे चल रही कूटनीतिक बातचीत में है। भारत ईरान के साथ संबंध बनाए रखते हुए पश्चिम एशिया में शांति और समुद्री सुरक्षा पर जोर दे रहा है, वहीं BRICS के मंच पर आर्थिक सहयोग और Global South की भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

इसलिए वायरल दावे को सबसे सटीक रूप में इस तरह कहा जा सकता है: मोदी-पेजेश्कियान की तस्वीर BRICS Business Forum के दौरान सामने आया एक मैत्रीपूर्ण और प्रतीकात्मक दृश्य है; इसे भारत की किसी सैन्य प्रतिबद्धता या युद्ध में पक्ष लेने की घोषणा के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।

डिस्क्लेमर: यह लेख 12 सितंबर 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय समाचार स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है। BRICS Summit 2026 अभी जारी है, इसलिए आगे होने वाली बैठकों, घोषणाओं या संयुक्त दस्तावेजों के आधार पर कुछ तथ्य अपडेट हो सकते हैं।

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