
आज विज्ञान और कृषि के क्षेत्र में GMO Food यानी Genetically Modified Food एक महत्वपूर्ण और चर्चा का विषय है। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर GMO खाद्य पदार्थों को लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं। कुछ लोग इन्हें कृषि उत्पादन बढ़ाने वाली आधुनिक तकनीक मानते हैं, जबकि कुछ लोग इनके स्वास्थ्य और पर्यावरण पर संभावित प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त करते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि GMO Food वास्तव में क्या होता है, इसे क्यों बनाया जाता है। क्या यह स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है और भारत में इसे लेकर किस प्रकार की नियामक व्यवस्था है।
इस विषय को समझने के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि सभी GMO खाद्य पदार्थों को एक जैसा नहीं माना जा सकता। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार अलग-अलग GM organisms में अलग-अलग genes और विशेषताएं हो सकती हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा का आकलन प्रत्येक उत्पाद के आधार पर किया जाना चाहिए।
GMO क्या होता है ?
GMO का पूरा नाम Genetically Modified Organism यानी आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव है। किसी जीव के DNA यानी genetic material में आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी की मदद से ऐसा बदलाव किया जाता है जो सामान्य mating या natural recombination से उस रूप में नहीं होता।
इस तकनीक के माध्यम से किसी जीव में किसी विशेष gene या genetic characteristic को शामिल किया जा सकता है। WHO के अनुसार आधुनिक biotechnology के जरिए अलग-अलग organisms से चुने गए genes को एक दूसरे में transfer किया जा सकता है, जिसमें कभी-कभी अलग प्रजातियों के organisms भी शामिल होते हैं।
जब ऐसे GM organisms से भोजन या food ingredients बनाए जाते हैं, तो उन्हें सामान्य रूप से GM Food या GMO Food कहा जाता है।
GMO Food क्यों बनाया जाता है ?
GM Food बनाने का उद्देश्य केवल भोजन को “जेनेटिक रूप से बदलना” नहीं होता। वैज्ञानिक किसी विशेष उपयोगी गुण को प्राप्त करने के लिए genetic modification करते हैं।
WHO के अनुसार बाजार में उपलब्ध कई GM crops को मुख्य रूप से कीटों से सुरक्षा, कुछ plant diseases से resistance और कुछ herbicides के प्रति tolerance जैसे traits के लिए विकसित किया गया है।
उदाहरण के लिए, कुछ GM crops में ऐसा genetic trait विकसित किया जाता है जिससे वे कुछ हानिकारक insects से अधिक सुरक्षित रह सकें। Bt technology इसका एक प्रमुख उदाहरण है। इसमें Bacillus thuringiensis नामक bacterium से संबंधित gene का उपयोग किया जाता है, जिसके कारण पौधे कुछ कीटों के विरुद्ध अपना बचाव कर सकते हैं।
कुछ GM crops को viral diseases के प्रति अधिक resistance देने के लिए विकसित किया गया है। इसके अतिरिक्त कुछ crops को विशेष herbicides के प्रति tolerance के लिए विकसित किया गया है, जिससे weed management में किसानों को सुविधा मिल सकती है।
क्या GMO Food और सामान्य hybrid फसल एक ही चीज है ?
नहीं। दोनों में अंतर है।
परंपरागत plant breeding में किसान और वैज्ञानिक अलग-अलग पौधों को cross-breed करके वांछित गुण प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इसके विपरीत genetic engineering में आधुनिक biotechnology की मदद से genetic material में अधिक targeted तरीके से बदलाव किया जा सकता है।
FAO के अनुसार मनुष्य हजारों वर्षों से अलग-अलग प्रकार की biotechnology और selective breeding का उपयोग करता आया है, लेकिन आधुनिक genetic modification तकनीकों ने genetic material में अधिक नियंत्रित तरीके से विशेष बदलाव करने की नई संभावनाएं उपलब्ध कराई हैं।
इसलिए हर hybrid food को GMO कहना सही नहीं है।
क्या GMO Food स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है ?
यह GMO से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।
WHO का कहना है कि अलग-अलग GM organisms में अलग-अलग genetic modifications होते हैं। इसलिए सभी GM foods को एक ही श्रेणी में रखकर यह कहना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है कि हर GMO food सुरक्षित है या हर GMO food असुरक्षित है।
WHO के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध GM foods ने safety assessments पास किए हैं और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर उन approved GM foods के सेवन से सामान्य आबादी में मानव स्वास्थ्य पर कोई प्रदर्शित हानिकारक प्रभाव सामने नहीं आया है। साथ ही WHO case-by-case safety assessment और आवश्यकता के अनुसार post-market monitoring को महत्वपूर्ण मानता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी भी नए GMO को बिना जांच के सुरक्षित मान लिया जाए। किसी नए GM food की safety का वैज्ञानिक मूल्यांकन उसके specific genetic modification, संभावित toxicity, allergenicity, nutritional composition और अन्य relevant characteristics के आधार पर किया जाता है।
भारत में भी FSSAI के GM Foods से संबंधित framework और scientific assessment पर काम करने वाला एक विशेष Scientific Panel on Genetically Modified Organisms and Foods मौजूद है।

GMO Food से किन बातों को लेकर चिंता होती है ?
GMO technology के संभावित लाभों के साथ कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न और चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं।
पहला मुद्दा allergenicity का है। यदि genetic modification से कोई नया protein बनता है, तो यह देखना जरूरी होता है कि उससे allergy का संभावित जोखिम तो नहीं बढ़ता।
दूसरा मुद्दा toxicity और nutritional composition से जुड़ा है। यह जांचना आवश्यक होता है कि genetic modification से भोजन में कोई अनचाहा harmful effect या महत्वपूर्ण nutritional change तो नहीं आया।
तीसरा मुद्दा environmental impact है। WHO और FAO दोनों ने environmental assessment की आवश्यकता पर जोर दिया है। संभावित चिंताओं में engineered genes का wild populations तक पहुंचना, non-target organisms पर प्रभाव, biodiversity में बदलाव और pesticide use में संभावित परिवर्तन जैसी बातें शामिल हैं।
इसलिए GMO की safety केवल यह देखकर तय नहीं की जाती कि वह genetically modified है, बल्कि यह देखा जाता है कि कौन-सा organism है, कौन-सा gene बदला गया है, modification से क्या नया trait आया है और उसका उपयोग किस परिस्थिति में किया जाएगा।
GMO Food के संभावित फायदे
GMO technology के समर्थक इसके कई संभावित कृषि और खाद्य संबंधी लाभ बताते हैं।
कुछ GM crops को कीटों से सुरक्षा देने के लिए विकसित किया गया है। इससे कुछ परिस्थितियों में insecticide के इस्तेमाल की आवश्यकता कम हो सकती है। WHO ने भी कुछ परिस्थितियों में Bt crops से insecticide use में कमी की संभावना का उल्लेख किया है।
इसके अलावा genetic engineering का इस्तेमाल ऐसे crops विकसित करने के लिए किया जा सकता है जिनमें drought tolerance, disease resistance या अन्य उपयोगी agricultural traits हों। FAO आधुनिक biotechnology में food security और agricultural productivity से संबंधित संभावनाओं को स्वीकार करता है, साथ ही इसके संभावित health, environmental और socioeconomic concerns पर science-based assessment की आवश्यकता बताता है।
हालांकि किसी विशेष GMO का वास्तविक फायदा उसकी crop, trait, farming system और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए हर GMO के बारे में एक समान दावा करना उचित नहीं होगा।
भारत में GMO Food की स्थिति क्या है ?
भारत में genetically engineered organisms से संबंधित environmental assessment में Genetic Engineering Appraisal Committee यानी GEAC की महत्वपूर्ण भूमिका है। GEAC, Ministry of Environment, Forest and Climate Change के अंतर्गत काम करता है और genetically engineered organisms तथा products के environmental release से संबंधित proposals का appraisal करता है।
GEAC की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार भारत में कुछ Bt cotton events को approval दिया गया है। GEAC के रिकॉर्ड में approved Bt cotton से संबंधित biosafety data में toxicity, allergenicity और animal feeding studies जैसी जानकारी का उल्लेख है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है: Bt cotton एक commercial crop है, लेकिन cotton सामान्य मानव भोजन नहीं है। इसलिए इसे सीधे edible GM food का उदाहरण मानना सही नहीं होगा।
भारत में GM foods के लिए FSSAI की regulatory framework पर भी काम हुआ है। FSSAI ने Food Safety and Standards (Genetically Modified Foods) Regulations, 2022 का draft जारी किया था। मसौदे में GM foods के लिए prior approval, safety assessment और कुछ परिस्थितियों में labelling जैसे प्रस्ताव शामिल थे।
लेकिन यहां सावधानी जरूरी है: FSSAI के 2024 Food Authority meeting minutes में GM Foods Regulations के final draft को व्यापक consultation की आवश्यकता के कारण defer किए जाने का उल्लेख है। इसलिए 2022 के मसौदे में प्रस्तावित provisions को वर्तमान final law के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
क्या GMO Food का मतलब जहरीला भोजन है ?
नहीं। यह कहना कि “हर GMO food जहरीला है” वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।
इसी तरह यह कहना भी उचित नहीं होगा कि हर GMO food बिना किसी जांच के पूरी तरह सुरक्षित है।
वैज्ञानिक और regulatory दृष्टिकोण यह है कि प्रत्येक GM food को उसके specific characteristics और intended use के आधार पर assess किया जाना चाहिए। WHO भी यही case-by-case approach बताता है।
GMO और Gene Editing में क्या अंतर है ?

आज genetic technology में केवल traditional GM technology ही नहीं, बल्कि gene editing जैसी नई तकनीकें भी शामिल हैं।
Gene editing में genome के किसी specific हिस्से में targeted बदलाव किए जा सकते हैं। FAO के अनुसार gene editing एक व्यापक term है जिसमें living organisms के genome में targeted changes करने वाली विभिन्न molecular biology techniques शामिल हैं।
इसलिए GMO, genetic engineering और gene editing शब्दों को बिना संदर्भ के एक-दूसरे का बिल्कुल समान अर्थ मानना उचित नहीं है।
GMO Food आधुनिक biotechnology का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जिसमें किसी organism के genetic material में वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से विशेष बदलाव किए जाते हैं। इसका उद्देश्य कीटों और diseases से सुरक्षा, कुछ agricultural traits में सुधार तथा भविष्य में खाद्य उत्पादन से जुड़ी अन्य चुनौतियों का समाधान करना हो सकता है।
साथ ही GMO technology से जुड़े health, environmental, biodiversity और socioeconomic concerns को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। WHO और FAO दोनों science-based, risk assessment और case-by-case evaluation पर जोर देते हैं।
इसलिए GMO Food के बारे में सबसे तथ्यात्मक निष्कर्ष यही है कि किसी खाद्य पदार्थ की safety केवल इसलिए तय नहीं की जा सकती कि वह GMO है या non-GMO। वास्तविक सवाल यह होता है कि उसमें कौन-सा genetic modification किया गया है, उससे कौन-सा नया trait आया है और संबंधित वैज्ञानिक तथा regulatory safety assessment में उसके बारे में क्या पाया गया है।
भारत में भी GM foods को लेकर regulatory framework विकसित करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है और FSSAI तथा GEAC जैसी संस्थाएं अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में safety और environmental considerations से संबंधित भूमिका निभाती हैं। इसलिए GMO Food पर किसी भी वायरल दावे को स्वीकार करने से पहले WHO, FAO, FSSAI और संबंधित भारतीय regulatory authorities की आधिकारिक जानकारी देखना अधिक विश्वसनीय तरीका है।



