
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और मध्य पूर्व के सबसे ताकतवर देशों में से एक के बीच छिड़ा युद्ध, महज कुछ ही महीनों में थम गया है। रविवार को एक ऐसा एलान किया गया, जिसने भू-राजनीति के समीकरण बदल कर रख दिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और ईरानी उप विदेश मंत्री काज़म गरीबाबादी ने संयुक्त रूप से इस बात की पुष्टि की कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम समझौता हो गया है।
आइए, इस ऐतिहासिक घटनाक्रम की पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं।
⚫ अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर ऐतिहासिक समझौते का हुआ एलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रविवार को एलान किया कि ईरान के साथ युद्धविराम समझौते पर सहमति बन गई है और अब होर्मुज़ स्ट्रेट से बिना किसी शुल्क के आवाजाही शुरू होगी। इसकी पुष्टि उप ईरानी विदेश मंत्री काज़म गरीबाबादी ने की। इस डील पर 19 जून को स्विट्ज़रलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह युद्ध 28-फरवरी को शुरू हुआ था।
⚫ युद्ध की दहलीज़ से शांति की राह तक
यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था। अमेरिका पर आरोप था कि ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में उसके व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहा है, जबकि ईरान का कहना था कि अमेरिकी प्रतिबंध उसके तेल निर्यात को पूरी तरह ठप करना चाहते हैं। होर्मुज़ स्ट्रेट दुनिया के कुल तेल उत्पादन के एक-तिहाई के परिवहन का रास्ता है। ऐसे में इस युद्ध ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया था।
हालांकि, पिछले कुछ दिनों में स्विट्जरलैंड के मध्यस्थता प्रयास रंग लाए। स्विट्जरलैंड ने हमेशा अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक पुल का काम किया है, और इस बार भी उसने बड़ी भूमिका निभाई। दोनों पक्षों के बीच गहन बातचीत के बाद यह डील तैयार हुई।
⚫ समझौते की मुख्य बातें क्या हैं?
इस समझौते को कई मायनों में ‘ऐतिहासिक’ बताया जा रहा है।
आइए जानते हैं इसके प्रमुख बिंदु:
1. तत्काल युद्धविरामः दोनों देशों ने सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने पर सहमति जताई है। इसका मतलब है कि होर्मुज़ स्ट्रेट और उसके आसपास कोई मिसाइल हमला, नौसैनिक घेराबंदी या ड्रोन हमले नहीं होंगे।
2. होर्मुज़ स्ट्रेट में मुफ्त आवाजाहीः सबसे बड़ी और चौंकाने
वाली बात यह है कि अब होर्मुज़ स्ट्रेट से बिना किसी शुल्क के आवाजाही शुरू होगी। यानी, अब ईरान उस रास्ते से गुजरने वाले अमेरिकी या उसके सहयोगी देशों के जहाजों पर कोई टैक्स या सुरक्षा शुल्क नहीं लगाएगा। यह ईरान की तरफ से एक बड़ी रियायत मानी जा रही है।
3. हस्ताक्षर की तारीख तयः इस ऐतिहासिक डील पर 19
जून को स्विट्जरलैंड के एक तटस्थ स्थान पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे। उम्मीद है कि इस मौके पर अमेरिकी विदेश मंत्री और ईरान के विदेश मंत्री मौजूद रहेंगे।
⚫ भारत और दुनिया के लिए इसका क्या मतलब है?
इस समझौते के दूरगामी परिणाम होंगे:
👉 भारत के लिए राहतः भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के
लिए मध्य पूर्व पर काफी निर्भर है। होर्मुज़ स्ट्रेट के खुलने से भारत को ईरान और सऊदी अरब से तेल आयात करने में आसानी होगी। साथ ही, भारत की चाबहार बंदरगाह परियोजना को भी नई रफ्तार मिल सकती है, क्योंकि इस रास्ते से अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचना अब सुरक्षित हो जाएगा।
👉 वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट: इस समझौते की खबर
मिलते ही वैश्विक बाजारों में क्रूड ऑयल के दाम में गिरावट आने की उम्मीद है। इससे दुनियाभर में मुद्रास्फीति पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।
👉 मध्य पूर्व में नया समीकरणः इस युद्धविराम से इज़राइल
और सऊदी अरब जैसे देशों की चिंताएं बढ़ सकती हैं, लेकिन दूसरी तरफ, यह तेल और गैस के स्थिर प्रवाह के लिए एक अच्छा संकेत है।
⚫ क्या दोस्ती हुई या सिर्फ युद्धविराम?
यह समझना जरूरी है कि यह ‘शांति समझौता’ नहीं है, बल्कि ‘युद्धविराम समझौता’ है। दोनों देशों के बीच गहरी दुश्मनी अभी खत्म नहीं हुई है। अमेरिका ने ईरान पर परमाणु महत्वाकांक्षाओं और क्षेत्रीय विस्तारवाद के आरोप नहीं हटाए हैं। वहीं, ईरान ने भी अमेरिकी प्रतिबंधों को पूरी तरह खत्म करने की शर्त रखी है।
लेकिन फिर भी, यह छोटा सा युद्धविराम उस लंबे संघर्ष का विराम है, जिसने पूरी दुनिया को तनाव में रखा था। होर्मुज़ के पानी में अब सिर्फ जहाज चलेंगे, मिसाइलें नहीं। 19 जून को दुनिया की निगाहें स्विट्जरलैंड पर होंगी, जहां यह ऐतिहासिक कागजात पर हस्ताक्षर होंगे।
यह समझौता इस बात का उदाहरण है कि कूटनीति, गोलियों की आवाज़ पर भी भारी पड़ सकती है। अमेरिका और ईरान जैसे विरोधी देश भी जब जनहित और वैश्विक सुरक्षा की बात आती है, तो एक मेज पर आ सकते हैं। अब देखना यह होगा कि यह युद्धविराम कितने दिनों तक टिकता है, और क्या यह एक नई शुरुआत का संकेत है या सिर्फ एक छोटा ठहराव।
क्या आपको लगता है कि यह समझौता लंबे समय तक चलेगा? अपने विचार कमेंट में ज़रूर साझा करें।