
वाशिंगटन डी.सी.: एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड
ट्रंप और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच तनातनी सामने आई है। इस बार विवाद का कारण है लेबनान में संभावित इज़राइली हमला। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू को फोन पर कड़ी फटकार लगाई और एक संभावित सैन्य कार्रवाई को रोक दिया 1 ।
⚫ आखिर मामला क्या है?
हाल के दिनों में इज़राइल और ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह के बीच तनाव चरम पर है। इज़राइल लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले कर रहा था। हाल ही में इज़राइल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहिये में हमले की योजना बनाई, जो हिजबुल्लाह का गढ़ माना जाता है।
⚫ ट्रंप ने क्या कहा ?
समाचार एजेंसी एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू से फोन पर बातचीत में उन्हें “पागल” (crazy) कह दिया और कथित तौर पर यहां तक कहा कि “अगर मैं नहीं होता तो तुम जेल में होते”
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘टुथ सोशल’ पर लिखा, “आज सुबह बेरूत में हुआ हमला नहीं होना चाहिए था, खासकर ऐसे विशेष दिन पर जब हम ईरान के साथ शांति समझौते के बेहद करीब हैं।”
उन्होंने आगे चेतावनी दी, “लेबनान में कहीं भी इज़राइल की ओर से और कोई हमला नहीं होना चाहिए… आइए इसे बर्बाद न करें।”
⚫ ट्रंप के गुस्से के पीछे की बड़ी वजहः ईरान डील
ट्रंप की इस कड़ी प्रतिक्रिया के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान के साथ होने वाला संभावित शांति समझौता है। ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ एक ऐतिहासिक समझौते की दहलीज पर खड़ा था, जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना और क्षेत्र में तनाव कम करना था
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच यह समझौता होमरूज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और संघर्ष विराम बढ़ाने के लिए था, लेकिन इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों के कारण ईरान ने बातचीत रोक दी थी। ट्रंप ने साफ कर दिया कि लेबनान में यह हमला इस नाजुक समझौते की प्रक्रिया को बाधित कर सकता था।
⚫ ट्रंप ने लेबनान में हमले को लेकर इज़रायल को लगाई लताड़
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने लेबनान में हमले को लेकर इज़रायल को लताड़ लगाई है। उन्होंने कहा, “आज सुबह हुआ हमला नहीं होना चाहिए था, खासकर ऐसे विशेष दिन पर जब हम ईरान के साथ शांति समझौते के बेहद करीब हैं।” उन्होंने कहा, “लेबनान में कहीं भी इज़रायल की ओर से और हमले नहीं होने चाहिए… आइए इसे बर्बाद ना करें।”
⚫ रुकी हुई स्ट्राइक और उसके बाद
ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद, इज़राइल ने उस विशेष हमले को अंजाम नहीं दिया, जिसकी योजना बनाई गई थी ।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि झड़पें पूरी तरह बंद हो गईं। इस घोषणा के बावजूद, दक्षिणी लेबनान में हल्की झड़पें
और रॉकेट हमले जारी रहे
ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने हिजबुल्लाह से भी बात की है और दोनों पक्षों ने गोलीबारी रोकने पर सहमति जताई है

⚫ क्या यह एक नई नीति है?
ट्रंप का यह रुख कई मायनों में अहम है। पारंपरिक रूप से अमेरिका, इज़राइल का सबसे मजबूत समर्थक रहा है। लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया कि अभी प्राथमिकता ईरान के साथ शांति समझौता है, भले ही उसके लिए इज़राइल को रोकना पड़े। उन्होंने नेतन्याहू को यह भी संदेश दिया कि जवाबी
कार्रवाई “आनुपातिक” होनी चाहिए और नागरिकों की मौत को रोका जाना चाहिए ।
यह पूरा प्रकरण दर्शाता है कि मध्य पूर्व की राजनीति कितनी तेजी से बदल रही है। एक तरफ जहां ट्रंप “लॉन्ग एंड ब्यूटीफुल पीस” (लंबी और खूबसूरत शांति) की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इज़राइल अपनी सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। फिलहाल, ट्रंप के दखल ने तत्काल एक बड़े टकराव को तो रोक दिया है, लेकिन क्षेत्र में शांति की राह अभी भी कांटों भरी है। अब सबकी निगाहें ईरान डील पर टिकी हैं, जिस पर हस्ताक्षर होते ही क्षेत्र का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।