
अमेरिका के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने 8 ऐसी आदतें बताई हैं जो चुपचाप गट हेल्थ खराब कर रही हैं। इनमें मोबाइल चलाते हुए खाना, नाश्ता छोड़ना, हर मील के बाद मीठा खाना, मामूली दर्द पर इबुप्रोफेन लेना, सिर्फ रात में पानी पीना, टॉयलेट की इच्छा रोकना, बार-बार स्नैकिंग करना और सोने से एक घंटे पहले खाना शामिल हैं।
⚫ डॉक्टर ने बताई 8 आदतें जो चुपचाप खराब कर रही हैं आपकी गट हेल्थ
क्या आप जानते हैं कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) का 70% हिस्सा हमारी आंत (Gut) पर निर्भर करता है? लेकिन हम अपनी कुछ रोजमर्रा की आदतों से अनजाने में ही अपनी इसी आंत को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
अमेरिका के प्रसिद्ध गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी (Dr. Saurabh Sethi) ने हाल ही में 8 ऐसी आदतों के बारे में बताया है, जो हमारी गट हेल्थ को चुपचाप (Silently) अंदर ही अंदर खोखला कर रही हैं। आइए, इन आदतों को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि इनसे कैसे बचा जाए।
1. मोबाइल चलाते हुए खाना (Distracted Eating)
क्या आप भी नाश्ता करते समय रील्स देखते हैं या खाना खाते समय ऑफिस का काम निपटाते हैं?
तथ्य: जब हम मोबाइल या लैपटॉप देखते हुए खाते हैं, तो हमारा फोकस खाने पर नहीं होता। इससे हमारा दिमाग ‘सेटियटी सिग्नल’ (पेट भरने का संकेत) नहीं पढ़ पाता।
नुकसान: यह आदत अधिक खाने (Overeating) को बढ़ावा देती है, जिससे ब्लोटिंग, गैस और एसिडिटी होती है। साथ ही, खाना ठीक से चबाया नहीं जाता, जिससे पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
2. नाश्ता छोड़ना (Skipping Breakfast)
वजन घटाने के चक्कर में या देर से उठने के कारण कई लोग नाश्ता नहीं करते।
तथ्यः नाश्ता दिन का पहला भोजन होता है जो रात भर के उपवास (Fasting) को तोड़ता है। इसे स्किप करने से पेट में एसिड का स्तर बिगड़ जाता है।
नुकसान: इससे अल्सर का खतरा बढ़ता है और गट बैक्टीरिया का साइकिल गड़बड़ा जाता है। नाश्ता न करने पर लोग दिन में बाद में ज्यादा जंक फूड खाते हैं, जिससे गट इंफ्लेमेशन होता है।
3. हर मील के बाद मीठा खाना (Compulsory Dessert)
चाहे दाल-चावल हो या राजमा-चावल, बिना मीठे के खाना अधूरा लगता है।
तथ्य: शुगर ‘बैड बैक्टीरिया’ और ‘यीस्ट’ (जैसे कैंडिडा) के लिए सबसे अच्छा ईंधन है।
नुकसान: हर भोजन के बाद शुगर लेने से गट में अच्छे बैक्टीरिया (Lactobacillus, Bifidobacteria) की संख्या घटती है और बैक्टीरिया का असंतुलन (Dysbiosis) होता है, जिससे कब्ज, दस्त और सूजन की समस्या रहने लगती है।
4. मामूली दर्द पर इबुप्रोफेन लेना (Overuse of Painkillers)
ज़रा सा सिर दर्द या बदन दर्द होते ही ‘ब्रूफेन’ या अन्य NSAIDs (नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स) लेना।
तथ्यः इबुप्रोफेन जैसी दवाएं पेट की सुरक्षात्मक परत (Mucous lining) को नुकसान पहुंचाती हैं।
नुकसान: ये आंतों में ‘लीकी गट सिंड्रोम’ (Leaky Gut) का कारण बन सकती हैं, जिसमें आंत की दीवारों से अनचाहे कण खून में मिल जाते हैं, जिससे एलर्जी और ऑटोइम्यून बीमारियां हो सकती हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना इन्हें लगातार न लें।
5. सिर्फ रात में पानी पीना (Only drinking water at night)
दिनभर पानी भूल जाना और रात को सोने से पहले 4-5 गिलास पानी पीकर कमी पूरी करना।
तथ्य: गट हेल्थ के लिए हाइड्रेशन जरूरी है, लेकिन रात में एक साथ अधिक पानी पीना सही नहीं है।
नुकसान: रात में ज्यादा पानी पीने से पाचक एंजाइम्स और गैस्ट्रिक जूस पतले हो जाते हैं, जिससे खाना सही से पच नहीं पाता। इससे सीने में जलन (Acid Reflux) और नींद में बाधा आती है। पूरे दिन थोड़ा-थोड़ा पानी पिएं।
6. टॉयलेट की इच्छा रोकना (Ignoring the Urge)
ऑफिस में मीटिंग है, सफर में हैं या फिर साफ-सफाई की कमी के कारण लोग टॉयलेट जाने की इच्छा को दबा देते हैं।
तथ्यः जब आपको शौच का दबाव बनता है, तो यह संकेत सीधे मस्तिष्क से आता है कि मल सिग्मॉयड कोलन से रेक्टम में आ गया है।
नुकसान: बार-बार इच्छा रोकने से रेक्टम में मल सूखकर
कठोर हो जाता है, जिससे क्रोनिक कब्ज (Chronic Constipation) और बवासीर (Piles) हो जाती है। लंबे समय में यह मोशन पास करने की नसों की संवेदनशीलता को भी खत्म कर देता है।
7. बार-बार स्नैकिंग करना (Frequent Snacking)
हर 1-2 घंटे में कुछ न कुछ खाते रहना – चिप्स, बिस्कुट, चाय-नमकीन।
तथ्यः हमारी आंत को खुद को साफ करने के लिए ‘माइग्रेटिंग मोटिलिटी कॉम्प्लेक्स’ (MMC) नामक प्रक्रिया की जरूरत होती है, जो केवल उपवास की स्थिति (खाने के बीच का गैप) में सक्रिय होती है।
नुकसान: बार-बार स्नैकिंग करने से MMC कभी एक्टिव नहीं हो पाता। इससे आंत में बैक्टीरिया ओवरग्रोथ (SIBO – Small Intestinal Bacterial Overgrowth) हो जाता है, जिससे लगातार गैस और पेट फूलता रहता है।
8. सोने से एक घंटे पहले खाना (Late Night Meals)
देर रात तक जागना और सोने से ठीक पहले दाल-रोटी या नूडल्स का भोजन करना।
तथ्यः सोने के समय हमारा पाचन तंत्र स्लो मोड में चला जाता है। मेलाटोनिन हार्मोन (जो नींद के लिए है) का पाचन एंजाइम्स पर विपरीत असर पड़ता है।

नुकसान: सोने से पहले खाना खाने से एसिड रिफ्लक्स और
सीने में जलन होती है। शरीर भोजन को ठीक से एब्जॉर्ब नहीं कर पाता, जिससे यह चर्बी के रूप में जमा होता है और सुबह भारीपन, सुस्ती और खराब मल बनता है। कोशिश करें कि सोने से 2-3 घंटे पहले खाना खा लें।
आंत (Gut) को हमारा ‘दूसरा मस्तिष्क’ कहा जाता है। ये छोटी-छोटी आदतें अगर लंबे समय तक जारी रहें, तो सिर्फ पाचन ही नहीं, बल्कि त्वचा (एक्ने), मूड (डिप्रेशन) और इम्यूनिटी पर भी बुरा असर डालती हैं।
डॉ. सौरभ सेठी का सुझाव है:
माइंडफुल ईटिंग करें, समय पर भोजन करें, शुगर कम करें और शरीर के प्राकृतिक सिग्नल्स (भूख, प्यास, शौच) को नजरअंदाज न करें।
क्या आपको लगता है कि ये आदतें आपमें भी हैं? अगर हां, तो आज ही किसी एक आदत को सुधारने की शुरुआत करें। स्वस्थ आंत ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल जानकारी के
उद्देश्य से है। यह किसी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी दवा या आहार में बदलाव से पहले अपने डॉक्टर से अवश्य परामर्श लें।