
रात में सोते समय दांतों को जोर से भींचना या उन्हें आपस में रगड़ना एक आम समस्या है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ब्रुक्सिज्म (Bruxism) कहा जाता है। यह व्यक्ति के जागते समय भी हो सकता है और नींद के दौरान भी। खास बात यह है कि नींद में दांत पीसने वाले व्यक्ति को अक्सर स्वयं इसकी जानकारी नहीं होती। National Institute of Dental and Craniofacial Research (NIDCR) के अनुसार, हल्का या कभी-कभार होने वाला ब्रुक्सिज्म हमेशा स्वास्थ्य समस्या नहीं होता, लेकिन बार-बार और गंभीर स्थिति में यह दांतों तथा जबड़े पर असर डाल सकता है।
नींद में दांत पीसने की मुख्य वजह क्या है ?
नींद में दांत पीसने का कोई एक निश्चित कारण हर व्यक्ति में नहीं होता। उपलब्ध चिकित्सा जानकारी के अनुसार यह कई कारकों के मेल से जुड़ा हो सकता है। तनाव और चिंता जागते समय होने वाले ब्रुक्सिज्म से संबंधित पाए जाते हैं, जबकि sleep bruxism को नींद के दौरान होने वाली मस्तिष्कीय गतिविधियों और नींद में छोटे-छोटे व्यवधानों से जोड़ा जाता है। Mayo Clinic के अनुसार इसके पीछे शारीरिक, मानसिक और आनुवंशिक कारकों का संयोजन हो सकता है।
इसके अलावा खराब नींद, रात में बार-बार जागना और कुछ sleep-related disorders भी भूमिका निभा सकते हैं। Leeds Teaching Hospitals NHS Trust के अनुसार तनाव, चिंता और नींद की समस्या होने पर sleep bruxism बढ़ सकता है। उसी स्रोत के अनुसार कैफीन, शराब और धूम्रपान भी कुछ लोगों में इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि हर व्यक्ति में दांत पीसने की वजह केवल तनाव ही है। American Dental Association की एक हालिया रिपोर्ट में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार insomnia और emotional distress का sleep bruxism से संबंध उतना सीधा नहीं पाया गया जितना अक्सर माना जाता है। इसलिए व्यक्तिगत कारणों का चिकित्सकीय मूल्यांकन महत्वपूर्ण है।
कैसे पता चले कि आप नींद में दांत पीसते हैं ?
कई बार इसकी जानकारी व्यक्ति को अपने परिवार या साथी से मिलती है, जो रात में दांत रगड़ने की आवाज सुनते हैं। इसके अलावा सुबह उठने पर जबड़े में दर्द या जकड़न, चेहरे की मांसपेशियों में थकान, सिरदर्द, दांतों में दर्द या संवेदनशीलता जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। लगातार और गंभीर ब्रुक्सिज्म से दांतों की सतह घिस सकती है तथा enamel में दरार या दांतों और dental restorations को नुकसान पहुंच सकता है।
इसलिए केवल आवाज आने को ही समस्या का प्रमाण मानना उचित नहीं है। दंत चिकित्सक दांतों के घिसने और अन्य संकेतों की जांच करके स्थिति का आकलन कर सकते हैं।
क्या दांत पीसना खतरनाक है ?
हर मामले में नहीं। NIDCR के अनुसार बहुत से मामलों में ब्रुक्सिज्म हल्का होता है और किसी विशेष उपचार की आवश्यकता नहीं पड़ती। लेकिन यदि यह लगातार और गंभीर हो, तो दांतों को नुकसान, जबड़े में दर्द, सिरदर्द और नींद में व्यवधान जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इसलिए इसे लेकर अनावश्यक डरने की भी जरूरत नहीं है और लगातार होने वाले लक्षणों को नजरअंदाज करना भी उचित नहीं है।
दांत पीसने से छुटकारा कैसे पाएं ?
सबसे पहले कारण और गंभीरता को समझना जरूरी है। यदि समस्या तनाव या खराब नींद से जुड़ी है, तो नियमित sleep schedule, पर्याप्त नींद और तनाव कम करने वाली स्वस्थ आदतें मदद कर सकती हैं। कैफीन, शराब और धूम्रपान कम करना भी कुछ लोगों में उपयोगी हो सकता है।
यदि दांतों को नुकसान हो रहा हो या जबड़े में दर्द हो, तो dentist से जांच कराना सबसे उचित कदम है। डॉक्टर या दंत चिकित्सक आवश्यकता के अनुसार night guard या अन्य dental treatment की सलाह दे सकते हैं। Mouth guard का उद्देश्य मुख्य रूप से दांतों को grinding से होने वाले नुकसान से बचाना और लक्षणों को नियंत्रित करना हो सकता है; यह हर व्यक्ति में ब्रुक्सिज्म की मूल वजह को समाप्त कर दे, ऐसा जरूरी नहीं है।
यदि डॉक्टर को किसी sleep disorder या अन्य स्वास्थ्य समस्या का संदेह हो, तो आगे की जांच या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह की आवश्यकता पड़ सकती है।