Friday, 11 September 202618:07 IST

बिहार के इम्तियाज अहमद ने अंतरिक्ष में रचा इतिहास: EOS-05 मिशन में निभाई बड़ी जिम्मेदारी, जानिए गांव से ISRO तक का पूरा सफर

Updated: 09 Sep 2026, 03:14 IST · By Yk Pasha · 1 min read
बिहार के इम्तियाज अहमद ने अंतरिक्ष में रचा इतिहास: EOS-05 मिशन में निभाई बड़ी जिम्मेदारी, जानिए गांव से ISRO तक का पूरा सफर
Advertisement
File 00000000fee0820b893c758302094af21928243118364118079 1024x576

बिहार के दरभंगा जिले के जाले प्रखंड स्थित रेवढ़ा गांव के वैज्ञानिक इम्तियाज अहमद इन दिनों चर्चा में हैं। 4 सितंबर 2026 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने GSLV-F17 रॉकेट से EOS-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया। इस मिशन में इम्तियाज अहमद ने परियोजना निदेशक (Project Director) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। उनकी उपलब्धि ने बिहार और खासकर मिथिलांचल का नाम देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम से जोड़ दिया है।

तथ्य-जांच नोट: वायरल पोस्ट/थंबनेल में उन्हें “देश का दूसरा अब्दुल कलाम” कहा जा रहा है। यह एक भावनात्मक उपमा है, आधिकारिक पद या वैज्ञानिक उपाधि नहीं। इसी तरह “पूरी दुनिया को हैरान कर दिया” जैसी भाषा भी समाचार शीर्षक के लिए अतिशयोक्तिपूर्ण हो सकती है। उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर तथ्य यह है कि इम्तियाज अहमद ने EOS-05 मिशन में परियोजना निदेशक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

EOS-05 मिशन आखिर इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
ISRO के अनुसार EOS-05 भारत का पहला ऐसा इमेजिंग अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की निगरानी के लिए बनाया गया है। इसे GSLV-F17 रॉकेट के माध्यम से 4 सितंबर 2026 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया।

GSLV-F17 ने EOS-05 को पहले Sub-Geosynchronous Transfer Orbit (Sub-GTO) में स्थापित किया। इसके बाद उपग्रह ने अपनी कक्षा को बढ़ाते हुए जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट की ओर यात्रा पूरी की। 7 सितंबर को अंतिम ऑर्बिट-रेजिंग मैन्युवर के बाद इसकी कक्षा लगभग 34,903 × 35,884 किलोमीटर हो गई।

यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इतनी ऊंची कक्षा से उपग्रह किसी बड़े क्षेत्र को लगातार या बार-बार निगरानी में रखने में सक्षम होता है।

Img 20260909 0842594621875324026605022 1024x604

कौन हैं वैज्ञानिक इम्तियाज अहमद?
इम्तियाज अहमद मूल रूप से बिहार के दरभंगा जिले के जाले प्रखंड के रेवढ़ा गांव से संबंधित हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव के मध्य विद्यालय से की। इसके बाद उन्होंने दरभंगा जिला स्कूल से मैट्रिक और पटना साइंस कॉलेज से विज्ञान की पढ़ाई की। आगे उन्होंने सिंदरी स्थित बिरसा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

यानी उनकी शिक्षा का शुरुआती सफर किसी बड़े महानगर के प्रतिष्ठित स्कूल से नहीं, बल्कि एक ग्रामीण परिवेश से शुरू हुआ और आगे चलकर वे भारत के सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक संस्थानों में से एक ISRO तक पहुंचे।

ISRO में कैसे बनाई अपनी पहचान?
रिपोर्टों के अनुसार इम्तियाज अहमद ने ISRO में 1998 में अपना करियर शुरू किया था और पिछले कई वर्षों में कई महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं।

इससे पहले भी उनका नाम महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़ चुका है। उदाहरण के लिए, 2024 में लॉन्च किए गए INSAT-3DS मौसम उपग्रह के परियोजना निदेशक के रूप में भी उनका उल्लेख किया गया था।

इसके अलावा 2024 में GSAT-20 मिशन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका की रिपोर्ट सामने आई थी।

इसलिए EOS-05 मिशन में उनकी जिम्मेदारी को उनके लंबे वैज्ञानिक करियर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है।

File 00000000d1d4820b8f8f350b14bd42658345777383612176655 1024x576

EOS-05 में इम्तियाज अहमद की क्या भूमिका थी?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इम्तियाज अहमद ने EOS-05 मिशन में Project Director के रूप में जिम्मेदारी संभाली। परियोजना निदेशक किसी मिशन की वैज्ञानिक और तकनीकी टीम के महत्वपूर्ण नेतृत्वकर्ताओं में शामिल होता है।

ऐसे बड़े अंतरिक्ष मिशन में उपग्रह की डिजाइन, निर्माण, परीक्षण, मिशन की आवश्यकताओं और विभिन्न तकनीकी टीमों के बीच समन्वय जैसे अनेक काम होते हैं।

हालांकि किसी एक वैज्ञानिक को पूरे मिशन की सफलता का अकेला जिम्मेदार बताना सही नहीं होगा। अंतरिक्ष मिशन सैकड़ों वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और विभिन्न ISRO केंद्रों की सामूहिक मेहनत का परिणाम होते हैं।

ISRO ने भी GSLV-F17/EOS-05 मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने की पुष्टि की है।

EOS-05 से भारत को क्या फायदा होगा?
EOS-05 का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य पृथ्वी का उच्च गुणवत्ता वाला अवलोकन करना है। इसकी मदद से कई क्षेत्रों में उपयोगी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

1. मौसम और पर्यावरण की निगरानी
उपग्रह से मिलने वाली तस्वीरें और डेटा मौसम एवं पर्यावरण की निगरानी में उपयोगी हो सकते हैं। इससे बड़े क्षेत्र में होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिलेगी।

2. प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी
बाढ़, चक्रवात, जंगल की आग और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पृथ्वी की तस्वीरें प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए उपयोगी हो सकती हैं।

3. कृषि क्षेत्र में मदद
फसलों, जमीन और वनस्पति में होने वाले बदलावों की निगरानी के लिए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। EOS-05 से मिलने वाला डेटा कृषि योजना और संसाधन प्रबंधन में उपयोगी हो सकता है।

4. वन एवं पर्यावरण संरक्षण
जंगलों और बड़े भौगोलिक क्षेत्रों की निगरानी में सैटेलाइट इमेजरी बेहद उपयोगी है। इससे वन क्षेत्र में बदलाव और पर्यावरणीय गतिविधियों का अध्ययन किया जा सकता है।

5. रणनीतिक उपयोग
EOS-05 का उपयोग रणनीतिक जरूरतों के लिए भी किया जा सकता है। हाल की रिपोर्टों में इसके भारतीय नौसेना की इमेजिंग जरूरतों में संभावित उपयोग का उल्लेख किया गया है।

जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट क्या होती है?
इसे आसान भाषा में समझें।

पृथ्वी अपनी धुरी पर लगभग 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है। यदि कोई उपग्रह ऐसी कक्षा में स्थापित किया जाए जिसकी कक्षीय अवधि पृथ्वी के घूर्णन से मेल खाती हो, तो वह पृथ्वी से देखने पर लंबे समय तक लगभग उसी क्षेत्र के ऊपर दिखाई दे सकता है।

EOS-05 को इसी प्रकार की Geosynchronous Orbit से पृथ्वी की इमेजिंग के लिए तैयार किया गया है।

यह सामान्य Low Earth Orbit वाले पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों से अलग व्यवस्था है। कम ऊंचाई वाले उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर तेजी से घूमते हैं और किसी स्थान के ऊपर सीमित समय के लिए ही दिखाई देते हैं, जबकि जियोसिंक्रोनस कक्षा बड़े क्षेत्र की लगातार निगरानी के लिए अधिक उपयुक्त हो सकती है।

GSLV-F17 की सफलता भी क्यों खास है?
EOS-05 को अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए GSLV-F17 का इस्तेमाल किया गया।

यह GSLV की 19वीं उड़ान थी। ISRO के अनुसार इस मिशन में GSLV-F17 ने EOS-05 को निर्धारित Sub-GTO में सफलतापूर्वक स्थापित किया।

EOS-05 का वजन लगभग 2,367 किलोग्राम बताया गया है और यह GSLV द्वारा लॉन्च किए गए भारी पृथ्वी-अवलोकन उपग्रहों में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

4 सितंबर 2026 का यह प्रक्षेपण ISRO के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे पहले जनवरी 2026 के PSLV-C62/EOS-N1 मिशन के बाद भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के लॉन्च कार्यक्रम में लगभग सात महीने का अंतर आया था।

बिहार के युवाओं के लिए क्यों प्रेरणादायक है इम्तियाज की कहानी?
इम्तियाज अहमद की कहानी केवल एक वैज्ञानिक की सफलता की कहानी नहीं है। यह उन लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो छोटे शहरों और गांवों से निकलकर बड़े सपने देखते हैं।

एक ग्रामीण क्षेत्र से शुरुआती शिक्षा प्राप्त करने के बाद विज्ञान की पढ़ाई करना, इंजीनियरिंग करना और फिर ISRO जैसे संस्थान में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तक पहुंचना बताता है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं होती।

उनकी कहानी यह संदेश देती है कि यदि विद्यार्थी को सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मेहनत और लगातार सीखने का अवसर मिले तो वह देश के सबसे कठिन वैज्ञानिक क्षेत्रों में भी अपनी जगह बना सकता है।

File 00000000db6881fd943479c4a29d5b308108943169242300963 1024x683

क्या इम्तियाज अहमद को “दूसरा अब्दुल कलाम” कहना सही है?
यह सवाल सोशल मीडिया पर तेजी से उठ रहा है।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भारत के महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति थे। इसलिए किसी भी वैज्ञानिक को “दूसरा अब्दुल कलाम” कहना औपचारिक या आधिकारिक उपाधि नहीं, बल्कि सम्मान और तुलना व्यक्त करने का तरीका है।

इम्तियाज अहमद की उपलब्धि निश्चित रूप से उल्लेखनीय है, लेकिन उनके वैज्ञानिक योगदान और करियर की तुलना डॉ. कलाम से करना अभी उचित नहीं होगा।

बेहतर होगा कि उन्हें उनकी अपनी उपलब्धियों के आधार पर पहचाना जाए—ISRO के वैज्ञानिक और EOS-05 मिशन के परियोजना निदेशक के रूप में।

दरभंगा के रेवढ़ा गांव से ISRO के महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन तक पहुंचने वाले इम्तियाज अहमद की कहानी बिहार के लिए गर्व की बात है। EOS-05 मिशन में परियोजना निदेशक के रूप में उनकी भूमिका ने उन्हें एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।

वहीं EOS-05 की सफलता भारत की पृथ्वी-अवलोकन क्षमता के लिए भी महत्वपूर्ण कदम है। जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की निगरानी करने वाला यह उपग्रह मौसम, आपदा प्रबंधन, कृषि, पर्यावरण और रणनीतिक जरूरतों सहित कई क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकता है।

Img 20260909 0841565692643788689568757 1024x768

इम्तियाज अहमद की उपलब्धि का सबसे बड़ा संदेश यही है—सपना गांव से देखा जा सकता है, लेकिन उसे पूरा करने के लिए मेहनत और वैज्ञानिक सोच की जरूरत होती है।

ISRO की आधिकारिक मिशन जानकारी EOS-05 को भारत का पहला Geosynchronous-orbit imaging satellite बताती है और GSLV-F17 द्वारा इसके सफल प्रक्षेपण की पुष्टि करती है।
इम्तियाज अहमद की शैक्षिक पृष्ठभूमि और EOS-05 में Project Director की भूमिका के बारे में उपलब्ध क्षेत्रीय रिपोर्टों में समान जानकारी दी गई है।

About The Author

Contact Us

कोई सुझाव, खबर या correction भेजना चाहते हैं? हमें संदेश भेजें।