
डॉक्टर तरंग अरोड़ा ने डेली रूटीन की 4 सिंपल चीज़ों को फॉलो करने की सलाह दी है जिन्हें रोज़ करने से न केवल स्ट्रेस कम होगा बल्कि मोटापा भी नहीं बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए नींद को नज़रअंदाज़ न करें, अकेलेपन का शिकार न हों, मूवमेंट करना न छोड़ें और डायफ्रॉमेटिक ब्रीदिंग की प्रैक्टिस करनी चाहिए।
क्या आप जानते हैं कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्ट्रेस (तनाव) और मोटापा (ओबेसिटी) दोनों ही आपस में जुड़ी हुई समस्याएं हैं? जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारे शरीर में कोर्टिसोल नामक हार्मोन बढ़ जाता है, जो पेट की चर्बी बढ़ाने का मुख्य कारण बनता है। इन दोनों समस्याओं से निजात पाने के लिए लोग महंगे जिम, डाइट प्लान या दवाइयों का सहारा लेते हैं, लेकिन असली समाधान बहुत सरल है।
प्रसिद्द डॉक्टर तरंग अरोड़ा के अनुसार, हर रोज़ की जिंदगी में मौजूद 4 सिंपल चीज़ों को अपनाकर हम बिना किसी दवा के स्ट्रेस और मोटापे को दूर कर सकते हैं। आइए, जानते हैं वे 4 आसान उपाय कौन से हैं और क्यों 90% लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।
⚫ नींद को नज़रअंदाज़ न करें (पर्याप्त और गहरी नींद)
डॉक्टर सबसे पहली सलाह देते हैं कि नींद के साथ समझौता न करें।
👉 तथ्य: एक वयस्क को कम से कम 7-8 घंटे की गहरी नींद की आवश्यकता होती है।
👉 लोग क्या गलती करते हैं: देर रात तक मोबाइल देखना,
लगातार काम करना या बिना समय निर्धारित के सोना।
👉 प्रभावः कम नींद लेने से कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है, जिससे भूख बढ़ती है और मेटाबॉलिज्म (चयापचय) धीमा हो जाता है। पर्याप्त नींद शरीर को रिपेयर करती है और तनाव हार्मोन को नियंत्रित रखती है।
⚫ अकेलेपन का शिकार न हों (सामाजिक जुड़ाव)
तनाव और मोटापे को दूर करने के लिए ‘कनेक्टेड रहना’ बहुत जरूरी है।
👉 तथ्यः शोध बताते हैं कि अकेलापन उतना ही हानिकारक है जितना धूम्रपान। यह ब्रेन में तनाव पैदा करता है।
👉 लोग क्या गलती करते हैं: सोशल मीडिया पर तो बहुत
एक्टिव रहते हैं, लेकिन रियल लाइफ में दोस्तों या परिवार से मिलना-जुलना कम कर देते हैं।
👉 प्रभावः अकेलापन मानसिक तनाव को बढ़ाता है, जिससे लोग कंफर्ट फूड (जंक फूड) खाने लगते हैं। परिवार या दोस्तों से अच्छा व्यवहार (अच्छी बातचीत और हंसी) तनाव कम करता है और हार्मोन्स को संतुलित रखता है।
⚫ मूवमेंट करना न छोड़ें (दिनभर सक्रिय रहना)
जरूरी नहीं कि मोटापा कम करने के लिए ही घंटों जिम में पसीना बहाना पड़े।
👉 तथ्य: लगातार बैठे रहना (Sedentary Lifestyle) नई बीमारियों की जड़ है।
👉 लोग क्या गलती करते हैं: ऑफिस में 8-9 घंटे कुर्सी पर
चिपके रहना, लिफ्ट का उपयोग करना, पार्किंग से दरवाजे तक गाड़ी ले जाना।
👉 प्रभावः डॉक्टर तरंग अरोड़ा का कहना है कि ‘मूवमेंट’
यानी छोटी-छोटी हरकतें – जैसे पानी लाने के लिए उठना, सीढ़ियां चढ़ना, थोड़ी-थोड़ी देर में टहलना- ये सब मेटाबॉलिज्म को एक्टिव रखते हैं। इससे कैलोरी बर्न होती है और मांसपेशियों में खिंचाव (स्ट्रेचिंग) से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
⚫ डायफ्रॉमेटिक ब्रीदिंग की प्रैक्टिस करें (सही तरीके से सांस लेना)
यह सबसे अनदेखा किया जाने वाला लेकिन सबसे कारगर उपाय है।
👉 तथ्यः डायफ्रॉमेटिक ब्रीदिंग का मतलब है डीप बेली ब्रीदिंग यानी पेट से गहरी सांस लेना। ज्यादातर लोग सिर्फ छाती से उथली (Shallow) सांसें लेते हैं।
👉 कैसे करें: सीधे बैठ जाएं। एक हाथ पेट पर रखें। धीरे-धीरे नाक से गहरी सांस लें, पेट को फुलाएं। फिर धीरे-धीरे मुंह से सांस छोड़ें, पेट अंदर करें। इसे दिन में 5-10 मिनट करें।
👉 प्रभावः यह क्रिया तुरंत पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (शरीर का आराम देने वाला सिस्टम) को एक्टिव करती है, जिससे कोर्टिसोल का लेवल तेजी से गिरता है। तनाव कम होने पर ओवरईटिंग की समस्या अपने आप कम हो जाती है।

निष्कर्ष
डॉक्टर तरंग अरोड़ा की ये 4 टिप्स बेहद सिंपल हैं, लेकिन इन्हें रोज़मर्रा की जिंदगी में शामिल करने में अक्सर लोग आलस या व्यस्तता की वजह से चूक जाते हैं।
याद रखें:
👉 अच्छी नींद शरीर का रिपेयर वर्क है।
👉 कनेक्शन (सामाजिक संबंध) दिल का सुकून है।
👉 मूवमेंट चर्बी पिघलाने की चाबी है।
👉 डायफ्रॉमेटिक ब्रीदिंग तनाव का फौरन इलाज है।
इन चारों को अपनी जीवनशैली में शामिल करें। आपको न केवल वजन कम होता दिखेगा, बल्कि मानसिक शांति और ऊर्जा का स्तर भी बढ़ जाएगा। आज ही शुरुआत करें – सबसे पहले 5 मिनट गहरी सांस लेने की प्रैक्टिस से !
अस्वीकरण: यह पोस्ट सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी चिकित्सीय समस्या के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।