
⚫ ईरान का बड़ा कदमः होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अब जहाज़ों से वसूला जाएगा टोल, जानें पूरा मामला
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी ने कहा है कि देश ने होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाज़ों के आवागमन को एक निर्धारित मार्ग से नियंत्रित करने के लिए एक ‘प्रोफेशनल मेकैनिज़्म’ का गठन किया है। उन्होंने कहा कि इस मार्ग के उपयोग के लिए ईरान शुल्क वसूलेगा और इसकी पूरी जानकारी बाद में जारी की जाएगी।
तेहरान – दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अब आवाजाही के नियम बदल गए हैं। ईरान ने आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया है कि वह इस रणनीतिक मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाज़ों से शुल्क (टोल) वसूलेगा। साथ ही, जहाजों को पहले से अनुमति लेनी होगी और अपनी पूरी जानकारी ईरानी अधिकारियों को देनी होगी। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
⚫ क्या है पूरा मामला?
यह घोषणा ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति
आयोग के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी ने 16 मई 2026 को की उन्होंने कहा कि ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़ों के आवागमन को एक निर्धारित मार्ग (Designated Route) से नियंत्रित करने के लिए एक ‘प्रोफेशनल मैकेनिज़्म’
(Professional Mechanism) तैयार किया है। इस मार्ग का उपयोग करने के लिए जहाज़ों को शुल्क देना होगा, जिसे ‘सर्विस फीस’ (सेवा शुल्क) का नाम दिया गया है
⚫ नए नियम क्या होंगे? (The New Rules)
ईरान के इस नए तंत्र के तहत, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को अब कई नई शर्तों का पालन करना होगा:
👉 पूर्व अनुमति अनिवार्य: अब कोई भी जहाज बिना ईरान
की पूर्व अनुमति के इस मार्ग से नहीं गुजर सकेगा ।
👉 शुल्क का भुगतान: निर्धारित रूट का उपयोग करने के
लिए जहाज़ों को टोल या सर्विस फीस देनी होगी। हालांकि, यह राशि कितनी होगी, इसकी घोषणा बाद में की जाएगी
👉 विस्तृत जानकारी साझा करनाः जहाज़ों को अपने
मालिकाना हक, क्रू की राष्ट्रीयता, कार्गो की प्रकृति, बीमा विवरण और यात्रा के सटीक रूट सहित 40 से अधिक जानकारियां ईरानी अधिकारियों को ईमेल के माध्यम से उपलब्ध करानी होंगी
👉 ईमेल से होगा संचारः इस पूरी प्रक्रिया के लिए info@PGSA.ir ईमेल आईडी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां जहाज़ ईरान की नियुक्त ‘फारसी गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ (PGSA) को अपनी जानकारी भेज सकते हैं यह तंत्र 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इज़राइल के साथ युद्ध शुरू होने और उसके बाद 8 अप्रैल को संघर्ष विराम (Ceasefire) लागू होने के बाद लाया गया है
⚫ किन देशों के जहाज़ों पर होगा असर?
ईरान ने साफ कर दिया है कि यह नियम सभी के लिए समान नहीं हैं। यह मुख्य रूप से व्यापारिक जहाजों (Commercial Vessels) और ईरान के सहयोगी देशों पर लागू होंगे
👉 भारत को प्राथमिकताः ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम
गरीबाबादी ने खुद कहा है कि भारत एक मित्र देश है और उसे इस मार्ग से गुजरने में प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि 13 भारतीय जहाजों में से 11 को पहले ही पार करने की अनुमति दे दी गई है ।
👉 चीन और पाकिस्तानः चीन, जापान और पाकिस्तान के
कई जहाज़ पहले ही ईरान के इस नियम को मानते हुए जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं
👉 प्रतिबंधित देशः वहीं, ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अमेरिका और इज़राइल से जुड़े जहाज़ों (दुश्मन देश) को इस रास्ते से गुजरने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह रास्ता उनके लिए हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है
⚫ क्या अंतरराष्ट्रीय कानून में इसकी इजाजत है?
यह सबसे विवादास्पद सवाल है। पश्चिमी देश और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) का उल्लंघन है ।
संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (UNCLOS) के तहत, अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य में जहाजों को “ट्रांजिट पैसेज” (Transit Passage) का अधिकार है, जिसे बाधित या निलंबित नहीं किया जा सकता । हालांकि, ईरान ने यह दलील दी है कि वह ‘ट्रांजिट फीस’ नहीं, बल्कि अपनी तरफ से दी जाने वाली नेविगेशन सहायता, सुरक्षा और बचाव सेवाओं के बदले ‘सर्विस फीस’ ले रहा है ।
गौरतलब है कि ईरान ने आधिकारिक तौर पर UNCLOS की पुष्टि (Ratify) नहीं की है, जिससे यह कानूनी पेंच और भी पेचीदा हो जाता है ।

⚫ क्यों उठा रहा है ईरान यह कदम ?
ईरान के इस फैसले के पीछे मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव है:
1. युद्ध और प्रतिबंध: 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और
इज़राइल द्वारा किए गए हमलों के बाद से ईरान ने होर्मुज़ पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।
2. जवाबी कार्रवाई: अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर
नौसैनिक नाकाबंदी लगा रखी है, जिसके जवाब में ईरान यह कदम उठा रहा है।
3. आर्थिक लाभः होर्मुज़ जलडमरूमध्य से रोजाना लगभग
2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, जो दुनिया की कुल सप्लाई का 20% है। इस पर नियंत्रण कर ईरान न केवल राजनीतिक दबदबा बना सकता है, बल्कि आर्थिक लाभ भी कमा सकता है।
⚫ क्या है भविष्य की संभावना?
ईरान का यह नियम पूरी तरह से लागू होना अभी बाकी है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और शिपिंग कंपनियां इस नए नियम को लेकर सतर्क हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान ने सख्ती से यह टोल वसूलना शुरू किया, तो वैश्विक तेल की कीमतों और समुद्री बीमा प्रीमियम (Marine Insurance Premium) पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
फिलहाल, स्थिति यह है कि होर्मुज़ से गुजरने के लिए अब “ईरान की अनुमति” लेना जरूरी हो गया है, चाहे वह कानूनी हो या नहीं।
अस्वीकरण: यह पोस्ट केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। भू-राजनीतिक स्थिति बेहद गतिशील है, इसलिए नवीनतम अपडेट के लिए आधिकारिक सूत्रों का अनुसरण करें।