Sunday, 13 September 202620:18 IST

विक्रम रॉकेट: Skyroot Aerospace की अंतरिक्ष यात्रा और भारत के निजी स्पेस सेक्टर की नई कहानी

Updated: 13 Sep 2026, 19:40 IST · By Yk Pasha · 2 min read
विक्रम रॉकेट: Skyroot Aerospace की अंतरिक्ष यात्रा और भारत के निजी स्पेस सेक्टर की नई कहानी
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भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम लंबे समय तक मुख्यतः सरकारी संस्थानों, विशेषकर Indian Space Research Organisation (ISRO), के नेतृत्व में आगे बढ़ता रहा। लेकिन 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद भारत में एक नए निजी Space-Tech Ecosystem का विकास शुरू हुआ।

इसी बदलाव से उभरने वाली प्रमुख कंपनियों में Skyroot Aerospace का नाम महत्वपूर्ण है। हैदराबाद स्थित इस भारतीय Space-Tech कंपनी ने Vikram-Series के माध्यम से छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए निजी लॉन्च-वाहन विकसित किए हैं।

Skyroot की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती पड़ाव Vikram-S था, जिसने 18 नवंबर 2022 को भारत के पहले निजी रूप से विकसित और निर्मित रॉकेट के रूप में उड़ान भरी। इसके बाद Vikram-I ने 18 जुलाई 2026 को भारत की पहली निजी orbital launch उपलब्धि हासिल की।

Skyroot Aerospace क्या है?
Skyroot Aerospace एक भारतीय निजी अंतरिक्ष कंपनी है, जिसकी स्थापना जून 2018 में Pawan Kumar Chandana और Naga Bharath Daka ने की थी। दोनों संस्थापकों की पृष्ठभूमि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़ी रही है।

कंपनी का मुख्य उद्देश्य ऐसे लॉन्च वाहन विकसित करना है, जिनकी मदद से छोटे उपग्रहों को अपेक्षाकृत लचीले और मांग-आधारित तरीके से पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाया जा सके।

Skyroot के लॉन्च वाहनों की श्रृंखला को Vikram-Series कहा जाता है। इसका नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के अग्रणी वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है।

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Vikram-S: भारत के निजी रॉकेट युग की शुरुआत
Vikram-S Skyroot का पहला रॉकेट था। यह orbital rocket नहीं, बल्कि एक suborbital launch vehicle था।

इसका मतलब है कि यह पृथ्वी की स्थायी कक्षा में उपग्रह स्थापित करने के लिए नहीं बनाया गया था। इसका प्रमुख उद्देश्य रॉकेट की तकनीकों और प्रणालियों का वास्तविक उड़ान में प्रदर्शन और परीक्षण करना था।

Mission Prarambh
Vikram-S की पहली उड़ान को Mission Prarambh नाम दिया गया।

18 नवंबर 2022 को सुबह लगभग 11:30 बजे IST पर इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित Satish Dhawan Space Centre से लॉन्च किया गया। मिशन को IN-SPACe ने अधिकृत किया था और ISRO ने आवश्यक तकनीकी सहयोग दिया।

ISRO के अनुसार Vikram-S लगभग 89.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा और मिशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ।

Skyroot के मिशन आंकड़ों के अनुसार उड़ान की अधिकतम ऊंचाई लगभग 88.8 km, अधिकतम गति Mach 5.07 और कुल उड़ान अवधि लगभग 301.4 सेकंड थी।

Vikram-S की प्रमुख विशेषताएं
Vikram-S एक single-stage, solid-fuelled suborbital rocket था।

भारत सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इसके प्रमुख तकनीकी तत्वों में शामिल थे:

🔹Solid-fuel propulsion
🔹Carbon-composite structure
🔹3D-printed components
🔹Advanced avionics
🔹Telemetry और tracking systems
🔹On-board camera तथा data-acquisition systems

भारत सरकार के अनुसार इसका द्रव्यमान लगभग 545 किलोग्राम और लंबाई लगभग 6 मीटर थी।

Vikram-S अपने साथ क्या लेकर गया था?
Mission Prarambh केवल रॉकेट का परीक्षण नहीं था। इसमें तीन customer payloads भी शामिल थे:

1. SpaceKidz India
2. N-Space Tech India
3. Bazoomq Armenia

इस प्रकार मिशन ने भारतीय निजी लॉन्च उद्योग के लिए तकनीकी प्रदर्शन के साथ-साथ commercial payload integration की क्षमता का भी प्रदर्शन किया।

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Vikram-S इतना महत्वपूर्ण क्यों था?
Vikram-S का महत्व केवल इसलिए नहीं था कि एक नया रॉकेट अंतरिक्ष तक पहुंचा।

इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि भारत में पहली बार किसी निजी कंपनी द्वारा विकसित और निर्मित launch vehicle को अंतरिक्ष की ओर सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।

ISRO ने इसे भारत में किसी निजी कंपनी द्वारा launch vehicle के पहले सफल प्रक्षेपण के रूप में दर्ज किया है।

इससे यह साबित हुआ कि भारत की निजी कंपनियां भी:

🔹Rocket propulsion
🔹Avionics
🔹Composite structures
🔹Flight software
🔹Telemetry
🔹Launch operations

जैसी जटिल तकनीकों पर काम कर सकती हैं।

Vikram-I: अगला और बड़ा कदम
Vikram-S का उद्देश्य मुख्यतः तकनीक को उड़ान में साबित करना था। इसके बाद Skyroot ने अपने orbital launch vehicle Vikram-I को विकसित किया।

Vikram-I का उद्देश्य छोटे satellites को Low Earth Orbit (LEO) में पहुंचाना है।

Skyroot के वर्तमान आधिकारिक विवरण के अनुसार Vikram-I लगभग 350 किलोग्राम तक payload को LEO में ले जाने की क्षमता के लिए बनाया गया है और इसकी संरचना में carbon-composite technology का उपयोग किया गया है।

18 जुलाई 2026: Vikram-I ने रचा इतिहास
Skyroot की कहानी का सबसे बड़ा पड़ाव 18 जुलाई 2026 को आया।

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ISRO के अनुसार उस दिन Vikram-I ने Satish Dhawan Space Centre, Sriharikota से उड़ान भरी और orbital mission पूरा किया। यह भारत की धरती से किसी भारतीय निजी कंपनी द्वारा किया गया पहला सफल private orbital launch था।

ISRO के अनुसार इस मिशन में Vikram-I ने कई payloads को लेकर उड़ान भरी और उनमें से SCOPE तथा Grahaa satellites को Low Earth Orbit में स्थापित किया गया।

इस उपलब्धि ने Skyroot को भारत की पहली निजी कंपनी बना दिया जिसने भारतीय भूमि से सफलतापूर्वक अपना rocket orbit तक पहुंचाया।

Vikram रॉकेट में Carbon Composite Technology का महत्व

Skyroot के Vikram-Series की महत्वपूर्ण तकनीकी विशेषताओं में carbon-composite structures शामिल हैं।

पारंपरिक धातु संरचनाओं की तुलना में advanced composite materials को हल्के और उच्च strength-to-weight ratio वाले aerospace structures के लिए उपयोग किया जा सकता है।

Vikram-S के मिशन में carbon-composite airframe ने उड़ान के दौरान उच्च aerodynamic और structural loads को सहन किया। Skyroot के अनुसार Vikram-S ने Mach 5 से अधिक गति पर भी structural integrity बनाए रखी।

3D Printing का इस्तेमाल
Skyroot ने rocket development में 3D-printed components और engines जैसी आधुनिक manufacturing technologies को भी अपनाया है।

यह तकनीक rocket manufacturing में complex geometries को कम manufacturing steps में बनाने और development cycle को तेज करने में उपयोगी हो सकती है।

Vikram-Series के development में 3D-printing का इस्तेमाल Skyroot की प्रमुख technological approaches में से एक रहा है।

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Vikram-II: भविष्य की अगली छलांग
Skyroot की योजना केवल Vikram-I तक सीमित नहीं है।

कंपनी के वर्तमान आधिकारिक portfolio के अनुसार Vikram-II को अगली पीढ़ी के अधिक शक्तिशाली launch vehicle के रूप में विकसित किया जा रहा है। कंपनी इसके लिए cryogenic engine और अधिक payload क्षमता की बात करती है।

Skyroot के अनुसार Vikram-II का लक्ष्य लगभग:
🔹900 kg तक Low Earth Orbit
🔹600 kg तक Sun-synchronous Orbit

की payload क्षमता प्रदान करना है।

कंपनी इसे 2027 के लिए लक्षित कर रही है, हालांकि भविष्य के launch schedules में बदलाव संभव हैं।

भारत के लिए इसका महत्व
Skyroot और Vikram-Series का महत्व केवल एक निजी कंपनी की सफलता तक सीमित नहीं है।

1. निजी Space Industry को बढ़ावा
भारत में private space companies के लिए यह एक महत्वपूर्ण proof-of-concept है कि निजी क्षेत्र launch vehicles विकसित और संचालित कर सकता है।

2. Satellite Launch Market
दुनिया में छोटे satellites की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में dedicated और flexible small-launch vehicles की मांग भी बढ़ रही है।
Skyroot इसी market को target कर रहा है।

3. रोजगार और तकनीकी कौशल
Private space companies के विस्तार से propulsion, electronics, software, materials science, manufacturing और aerospace engineering जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

4. ISRO पर commercial pressure कम करने की संभावना
यदि private launch providers सफलतापूर्वक commercial launches करने लगते हैं, तो छोटे satellite missions के लिए सरकारी launch infrastructure पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है।

5. भारत की Space Economy
Private companies के आने से भारत की space economy में manufacturing, launch services, satellite applications और downstream technologies के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

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IN-SPACe की भूमिका
भारत में निजी अंतरिक्ष गतिविधियों के विस्तार में Indian National Space Promotion and Authorisation Centre (IN-SPACe) की महत्वपूर्ण भूमिका है।

Vikram-S के launch को IN-SPACe से authorization मिला था। भारत सरकार ने IN-SPACe को private/non-government entities की space activities को promote, facilitate और authorize करने के लिए एक single-window mechanism के रूप में स्थापित किया है।

इसलिए Vikram-S की सफलता को केवल Skyroot की उपलब्धि के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह सरकार + ISRO + IN-SPACe + private industry के सहयोग से विकसित हो रहे नए भारतीय space ecosystem का भी उदाहरण है।

क्या Vikram-S भारत का पहला निजी orbital rocket था?

नहीं।
यह अंतर बहुत महत्वपूर्ण है।
Vikram-S भारत का पहला निजी रूप से विकसित और निर्मित suborbital launch vehicle था।

इसने orbit में satellite स्थापित नहीं किया था।

बाद में Vikram-I ने 18 जुलाई 2026 को सफल orbital mission पूरा करके इस उपलब्धि को अगले स्तर पर पहुंचाया। ISRO ने Vikram-I को भारत की पहली private orbital launch उपलब्धि के रूप में दर्ज किया है।

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Vikram-Series का व्यापक लक्ष्य
Skyroot का लक्ष्य केवल रॉकेट बनाना नहीं है। कंपनी छोटे satellite operators को on-demand, dedicated और flexible access to space उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।

कंपनी के अनुसार Vikram-Series को अलग-अलग satellite deployment requirements के अनुसार उपयोग करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है।

यही कारण है कि Skyroot का business model केवल “rocket manufacturing” से आगे बढ़कर commercial launch services पर केंद्रित है।

Vikram-S से शुरू हुई Skyroot Aerospace की यात्रा भारतीय निजी अंतरिक्ष उद्योग के विकास की एक महत्वपूर्ण कहानी है।

18 नवंबर 2022 को Vikram-S ने Mission Prarambh के माध्यम से भारत के private rocket era की शुरुआत की। यह suborbital mission था और इसका प्रमुख उद्देश्य तकनीकों को वास्तविक उड़ान में साबित करना था।

इसके लगभग चार वर्ष बाद 18 जुलाई 2026 को Vikram-I ने सफल orbital mission पूरा करके भारतीय private space industry के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा।

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इस पूरी यात्रा को एक वाक्य में समझें तो—
Vikram-S ने भारत के निजी रॉकेट क्षेत्र का “प्रारंभ” किया, जबकि Vikram-I ने उसे सफल orbital launch तक पहुंचाया।

और यही Skyroot Aerospace की सबसे बड़ी उपलब्धि है—भारत में अंतरिक्ष तक पहुंच अब केवल सरकारी संस्थानों की क्षमता नहीं रह गई है; निजी भारतीय कंपनियां भी अपने launch vehicles के साथ इस क्षेत्र में वास्तविक भूमिका निभा रही हैं।

स्रोत: ISRO, भारत सरकार/PIB, IN-SPACe और Skyroot Aerospace के आधिकारिक विवरणों को प्राथमिक आधार बनाया गया है।

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