
सोशल मीडिया और समाचारों में अक्सर यह दावा देखने को मिलता है कि पीरियड्स का दर्द हार्ट अटैक जितना गंभीर हो सकता है। इस दावे ने कई लोगों के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या यह सच है या केवल अतिशयोक्ति।
डॉक्टर कुनाल सूद द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) से जुड़े शोधों और दर्द संबंधी अध्ययनों में यह पाया गया है कि कुछ महिलाओं द्वारा अनुभव किया जाने वाला पीरियड्स का दर्द दर्द की तीव्रता (Pain Intensity) के स्तर पर हार्ट अटैक जितना महसूस हो सकता है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि पीरियड्स और हार्ट अटैक एक जैसी बीमारी हैं या दोनों शरीर पर समान प्रभाव डालते हैं।
इस लेख में हम चिकित्सा तथ्यों के आधार पर समझेंगे कि इस दावे का वास्तविक अर्थ क्या है।
⚫ पीरियड्स का दर्द क्यों होता है?
मासिक धर्म (Menstruation) के दौरान गर्भाशय की अंदरूनी परत बाहर निकलती है। इस प्रक्रिया में गर्भाशय सिकुड़ता है, जिससे रक्त और ऊतक बाहर निकलते हैं।
इस सिकुड़न के लिए शरीर प्रोस्टाग्लैंडिन (Prostaglandins) नामक रसायन बनाता है।
यदि शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन का स्तर अधिक हो जाए तो—
👉 पेट के निचले हिस्से में तेज़ दर्द
👉 कमर दर्द
👉 जांघों में दर्द
👉 मतली
👉 उल्टी
👉 दस्त
👉 कमजोरी
जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
⚫ क्या वास्तव में यह दर्द हार्ट अटैक जितना हो सकता है?
चिकित्सकों के अनुसार इसका उत्तर कुछ मामलों में “हाँ”, लेकिन सीमित संदर्भ में है।
इसका मतलब यह नहीं है कि पीरियड्स के दौरान महिला को हार्ट अटैक आ रहा होता है।
वास्तव में शोध का आशय यह है कि दर्द की अनुभूति (Pain Perception) कुछ महिलाओं में इतनी अधिक हो सकती है कि वे उसे हार्ट अटैक के दौरान होने वाले दर्द जितना तीव्र महसूस करें।
दर्द का अनुभव प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग होता है और इसे सीधे एक बीमारी से दूसरी बीमारी के बराबर नहीं माना जा सकता।

⚫ सेकेंडरी डिसमेनोरिया क्या है?
डॉक्टरों के अनुसार पीरियड्स का दर्द दो प्रकार का होता है।
1. प्राइमरी डिसमेनोरिया
👉 सामान्य मासिक धर्म दर्द
👉 किशोरियों और युवा महिलाओं में अधिक
👉 किसी अन्य बीमारी से संबंधित नहीं
2. सेकेंडरी डिसमेनोरिया
यह किसी चिकित्सीय समस्या के कारण होने वाला दर्द होता है।
इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं—
👉 एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis)
👉 एडेनोमायोसिस (Adenomyosis)
👉 गर्भाशय में फाइब्रॉइड (Fibroids)
👉 पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID)
👉 गर्भाशय या सर्विक्स से जुड़ी अन्य समस्याएं
इसी प्रकार के मामलों में दर्द काफी अधिक हो सकता है।
⚫ कब डॉक्टर से तुरंत मिलना चाहिए?
यदि निम्न में से कोई लक्षण हों तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है
⚫ एंडोमेट्रियोसिस क्या है?
एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर विकसित होने लगती हैं।
इसके लक्षण हो सकते हैं—
👉 अत्यधिक पीरियड्स दर्द
👉 संभोग के दौरान दर्द
👉 मलत्याग या पेशाब के समय दर्द
👉 अत्यधिक रक्तस्राव
👉 गर्भधारण में कठिनाई
यदि लंबे समय तक अत्यधिक दर्द बना रहे तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
⚫ हार्ट अटैक और पीरियड्स दर्द में क्या अंतर है?
हालांकि दर्द की तीव्रता कुछ लोगों को समान महसूस हो सकती है, लेकिन दोनों स्थितियां पूरी तरह अलग हैं।
⚫ पीरियड्स दर्द
👉 गर्भाशय की सिकुड़न से संबंधित
👉 पेट और कमर में अधिक
👉 आमतौर पर कुछ घंटों से 2–3 दिन तक
⚫ हार्ट अटैक
👉 हृदय की रक्त आपूर्ति में रुकावट
👉 सीने में दबाव या जकड़न
👉 दर्द कंधे, बांह, गर्दन या जबड़े तक फैल सकता है
👉 सांस फूलना, पसीना, घबराहट जैसे लक्षण भी हो सकते हैं
यदि किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
👉 दर्द असहनीय हो
👉 दर्द हर महीने लगातार बढ़ता जाए
👉 सामान्य दर्द निवारक दवाओं से आराम न मिले
👉 अत्यधिक रक्तस्राव हो
👉 बुखार के साथ दर्द हो
👉 पीरियड्स के अलावा भी लगातार पेल्विक दर्द बना रहे
⚫ दर्द कम करने के उपाय
डॉक्टर की सलाह के अनुसार निम्न उपाय मदद कर सकते हैं—
👉 पेट पर हल्की गर्म सिकाई
👉 नियमित व्यायाम
👉 पर्याप्त नींद
👉 संतुलित भोजन
👉 पर्याप्त पानी पीना
👉 तनाव कम रखना
👉 आवश्यकता होने पर केवल डॉक्टर की सलाह से दर्द निवारक दवाओं का उपयोग
यदि दर्द बार-बार अत्यधिक हो रहा हो तो स्वयं दवा लेने के बजाय स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना अधिक उचित है।
⚫ क्या हर महिला को इतना दर्द होता है?
नहीं।

हर महिला का अनुभव अलग होता है।
👉 कुछ महिलाओं को केवल हल्की ऐंठन होती है।
👉 कुछ को मध्यम दर्द होता है।
👉 जबकि कुछ महिलाओं, विशेषकर सेकेंडरी डिसमेनोरिया या एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्थितियों में, दर्द अत्यधिक गंभीर हो सकता है।
“पीरियड्स का दर्द हार्ट अटैक जितना हो सकता है” इस कथन का अर्थ यह नहीं है कि दोनों बीमारियां समान हैं। इसका आशय केवल इतना है कि कुछ महिलाओं द्वारा महसूस की जाने वाली दर्द की तीव्रता बहुत अधिक हो सकती है, विशेष रूप से सेकेंडरी डिसमेनोरिया या एंडोमेट्रियोसिस जैसी चिकित्सीय स्थितियों में।
यदि मासिक धर्म के दौरान दर्द असामान्य रूप से अधिक हो, रोजमर्रा के काम प्रभावित हों या हर महीने दर्द बढ़ता जाए, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच और उचित उपचार कई गंभीर समस्याओं की पहचान और प्रबंधन में मदद कर सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह किसी चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। यदि आपको अत्यधिक पीरियड्स दर्द, असामान्य रक्तस्राव या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।