
पटना: बिहार की नई सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और
अधिकारियों को राहत देते हुए एक पुराने विवादास्पद आदेश को तुरंत प्रभाव से वापस ले लिया है। यह फैसला नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा 7 अप्रैल को जारी किए गए उस निर्देश के खिलाफ आया है, जिसमें कर्मियों को सेवाकाल में सिर्फ एक बार प्रतियोगी परीक्षा देने की अनुमति थी।
⚫ क्या था पुराना आदेश?
7 अप्रैल 2024 (तत्कालीन सरकार के कार्यकाल) को नगर विकास एवं आवास विभाग ने एक परिपत्र जारी कर कहा था कि राज्य के सरकारी कर्मचारी और अधिकारी अपनी सेवा अवधि के दौरान केवल एक बार ही किसी विभागीय या राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा में बैठ सकेंगे। आदेश के मुताबिक यदि कोई कर्मचारी पहली बार परीक्षा में असफल रहता था या उसे चयनित नहीं किया जाता था, तो वह दोबारा परीक्षा नहीं दे सकता था।
इस आदेश के चलते हज़ारों सरकारी कर्मचारी जो अपनी योग्यता बढ़ाने या उच्च पदों पर जाने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, उनके सपनों पर पानी फिर गया था।
⚫ बिहार की नई सरकार ने बदला पुराना आदेश, अब सरकारी कर्मी व अधिकारी दे सकेंगे प्रतियोगी परीक्षा
बिहार की नई सरकार ने नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा 7-अप्रैल को जारी किए गए उस आदेश को वापस ले लिया है जिसमें सरकारी कर्मियों-अधिकारियों के बार-बार प्रतियोगी परीक्षा देने पर रोक लगाई गई थी। दरअसल, पूर्व आदेश में कहा गया था कि सरकारी कर्मी-अधिकारी सेवाकाल में केवल एक बार विभागीय या प्रतियोगी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
⚫ क्यों उठा था विवाद?
पुराने आदेश की तीन बड़ी कमियाँ बताई जा रही थीं
1. कैरियर की सीढ़ी पर रोक: कई सरकारी कर्मचारी
धीरे-धीरे बेहतर अवसरों के लिए परीक्षा देते हैं। एक मौका मिलने के बावजूद यदि उनका चयन नहीं होता, तो उनके लिए आगे कोई रास्ता नहीं बचता था।
2. मनमानी का आरोप: कर्मचारी संघों ने इसे “मनमाना और
तर्कहीन” करार दिया था। उनका कहना था कि केंद्र सरकार और अधिकांश राज्यों में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है।
3. अभ्यास पर प्रतिबंध: प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के
लिए अभ्यास और कई बार प्रयास करने की ज़रूरत होती है। सिर्फ एक मौका देना कर्मचारियों के साथ अन्याय था।
⚫ नई सरकार ने क्या बदला?
नई सरकार ने सत्ता संभालते ही इस आदेश पर त्वरित संज्ञान लिया। नगर विकास एवं आवास विभाग ने नया निर्देश जारी करते हुए पिछले आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया। अब सरकारी कर्मी और अधिकारी
👉 बिना किसी प्रतिबंध के सेवाकाल के दौरान कितनी भी बार प्रतियोगी परीक्षा दे सकेंगे।
👉 विभागीय प्रोन्नति परीक्षाओं के साथ-साथ राज्य स्तरीय संयुक्त प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे बीपीएससी, बीएसएससी) में भी शामिल हो सकेंगे।
👉 असफलता के बाद दोबारा प्रयास करने पर कोई रोक नहीं होगी।
⚫ कर्मचारियों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
सरकारी कर्मचारी संघों ने इस फैसले का खुलकर स्वागत किया है। बिहार राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष ने कहा, “यह ऐतिहासिक निर्णय है। इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने का पूरा मौका मिलेगा।”
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सरकारी तंत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और अच्छे कर्मचारी उच्च पदों पर आसीन हो सकेंगे, जिससे जनता को बेहतर प्रशासन मिलेगा।
⚫ नए आदेश के बड़े फायदे


⚫ क्या है आगे का रास्ता ?
हालाँकि यह आदेश अब लागू हो चुका है, लेकिन कर्मचारी संघों की मांग है कि
1. इस आदेश को लागू करने की प्रक्रिया सरल बनाई जाए।
2. जिन कर्मचारियों को पुराने आदेश के कारण परीक्षा देने से रोका गया था, उन्हें विशेष अवसर दिया जाए।
3. इस नियम को केवल नगर विकास विभाग तक सीमित न रखते हुए सभी विभागों में समान रूप से लागू किया जाए।
बिहार की नई सरकार का यह कदम “सुशासन और कर्मचारी कल्याण” की दिशा में एक बड़ा संकेत है। पुराने आदेश की बेड़ियाँ तोड़कर अब सरकारी कर्मचारी फिर से नई ऊँचाइयों को छूने के लिए स्वतंत्र हैं। यह न सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला है, बल्कि राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों के सपनों में नई जान फूंकने वाला निर्णय भी है।
क्या आप बिहार सरकार के इस फैसले को सही मानते हैं? अपने विचार कमेंट बॉक्स में ज़रूर साझा करें