
नई दिल्ली। राजनीति में बड़े उलटफेर की एक और खबर सामने आई है। देश की ऊपरी सदन राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सीटों में एक बार फिर इजाफा हुआ है। दिल्ली की पूर्व उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) की वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया की पत्नी सीमा सिसोदिया, पूर्व सांसद राघव चड्डा, एनडी गुप्ता समेत कुल 7 राज्यसभा सांसदों ने आप छोड़ने के बाद भाजपा का दामन थाम लिया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने न सिर्फ आप को बड़ा झटका दिया है, बल्कि राज्यसभा में भाजपा की कुल सीटों का आंकड़ा भी बढ़ा दिया है।
⚫ भाजपा की बढ़तः कितनी हुई अब कुल सीटें?
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन 7 सांसदों के शामिल होने के बाद राज्यसभा में भाजपा के सांसदों की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई है। यह बढ़त भाजपा के लिए कई मायनों में अहम है। हालांकि पूर्ण बहुमत (मौजूदा संख्या 245 में से 123) से भाजपा अभी भी 10 सीटों से दूर है, लेकिन एनडीए के अन्य दलों को मिलाकर यह संख्या अब काफी मजबूत हो जाती है। लगातार लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी भाजपा का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
⚫ आप की हालतः 10 से सिमटकर सिर्फ 3 के बीच
इस घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी (आप) को जमकर नुकसान पहुंचाया है। पिछले कुछ समय में दिल्ली और पंजाब में मिली हार के बाद अब राज्यसभा में पार्टी की ताकत बेहद कमजोर हो गई है। दरअसल, इन 7 सांसदों के पार्टी छोड़ने से पहले राज्यसभा में आप के 10 सांसद थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर सिर्फ 3 रह गई है। यह पार्टी के राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, भाजपा अपनी सियासी ताकत का इस्तेमाल करते हुए न सिर्फ सत्ता की दूसरी पार्टियों के सांसदों को तोड़ रही है, बल्कि विपक्ष के उन गढ़ों में भी सेंध लगा रही है, जहां से विपक्षी आवाजें उठ रही थीं।
⚫ राघव चड्डा से लेकर सीमा सिसोदिया तक – किसने और क्यों बदली पार्टी?
भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों में प्रमुख नाम हैं
1. राघव चड्डा – पूर्व राज्यसभा सांसद और आप के मशहूर चेहरे।
2. सीमा सिसोदिया – मनीष सिसोदिया की पत्नी।
3. एनडी गुप्ता – चंडीगढ़ से राज्यसभा सांसद।
4. संदीप कुमार पाठक – उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद।
5. चैल हरगोविंद नारायण सिंह और 6-7 अन्य नेता।
इन नेताओं के भाजपा में शामिल होने के पीछे तमाम कारण बताए जा रहे हैं। कुछ विश्लेषक इसे दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले (जिसमें आप के कई बड़े नेता जेल में हैं) का नतीजा मान रहे हैं तो कुछ के अनुसार, भाजपा के बढ़ते जनाधार और केंद्र में मजबूत सरकार के कारण सांसद बेहतर राजनीतिक भविष्य के लिए भाजपा का दामन थाम रहे हैं।
⚫ राज्यसभा की नई समीकरणः क्या अब आसान होगा बिल पास करना?
हालांकि राज्यसभा में भाजपा को संख्याबल अभी भी अकेले बहुमत नहीं देता, लेकिन एनडीए के सहयोगी दलों (जैसे जेडीयू, अपना दल, शिवसेना के एक गुट आदि) को मिलाकर यह संख्या लगभग 120 के करीब पहुंच जाती है। इसके साथ ही, कुछ निर्दलीय और क्षेत्रीय दलों के सांसदों के समर्थन से भाजपा के लिए महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करवाना और भी आसान हो जाएगा। विपक्ष (खासकर कांग्रेस, तृणमूल और समाजवादी पार्टी) के लिए सरकार पर दबाव बनाना अब पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है।
राघव चड्डा और अन्य सांसदों के भाजपा में शामिल होने का यह घटनाक्रम साफ इशारा करता है कि 2024 के आम चुनावों के बाद राजनीतिक ध्रुवीकरण और मजबूत हुआ है। जहां एक तरफ भाजपा ने अपनी स्थिति सुदृढ़ कर ली है, वहीं आम आदमी पार्टी जैसी क्षेत्रीय दल गंभीर संकट से गुजर रही है। राज्यसभा के नए ये आंकड़े – भाजपा 113, आप 3 – आने वाले समय में संसदीय राजनीति का नया समीकरण तय करेंगे। अब देखना यह होगा कि आप इस डगर से उबर पाती है या भाजपा अपने इस दबदबे का इस्तेमाल विपक्ष को और छोटा करने के लिए करती है।

यह पोस्ट उपलब्ध तथ्यों और राजनीतिक विश्लेषण पर आधारित है। सटीक सीट संख्या में सांसदों के इस्तीफे, नामांकन या चुनाव के अनुसार बदलाव संभव है।