Friday, 11 September 202618:19 IST

गंदगी से भरी नदी को अकेले साफ करने वाले ‘बिट्टू तबाही’ को डच CEO ने दिया नौकरी का ऑफर

Updated: 09 Sep 2026, 08:08 IST · By Yk Pasha · 1 min read
गंदगी से भरी नदी को अकेले साफ करने वाले ‘बिट्टू तबाही’ को डच CEO ने दिया नौकरी का ऑफर
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मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा के रहने वाले युवा सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जाना जाता है, इन दिनों अपने अनोखे पर्यावरण अभियान को लेकर चर्चा में हैं। जिस नदी में प्लास्टिक, बोतलें, कचरा और अन्य गंदगी जमा हो गई थी, उसे साफ करने के लिए उन्होंने महीनों तक खुद मेहनत की। उनके इस प्रयास की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए और देखते ही देखते उनकी कहानी भारत से निकलकर विदेश तक पहुंच गई।

सबसे खास बात यह है कि उनके काम से प्रभावित होकर The Ocean Cleanup के संस्थापक और CEO बोयन स्लैट (Boyan Slat) ने उन्हें अपनी संस्था के साथ काम करने का न्योता दिया। यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक स्थानीय युवा की जमीनी स्तर की पर्यावरणीय पहल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है।

कौन हैं ‘बिट्टू तबाही’?
‘बिट्टू तबाही’ का वास्तविक नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है। वह मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा क्षेत्र से हैं और रिपोर्टों के अनुसार BSc के छात्र हैं। उन्होंने अपने आसपास नदी की खराब स्थिति देखी और इसे बदलने का फैसला किया।

उनका अभियान किसी बड़े सरकारी प्रोजेक्ट या बड़ी मशीनरी के साथ शुरू नहीं हुआ था। उन्होंने खुद नदी में उतरकर प्लास्टिक, बोतलें, कचरा, खरपतवार और दूसरी गंदगी निकालनी शुरू की। शुरुआत में कुछ दोस्तों ने भी मदद की, लेकिन बाद में वह काफी हद तक अकेले ही इस काम को आगे बढ़ाते रहे।

26 जनवरी से शुरू किया नदी की सफाई का अभियान
रिपोर्टों के मुताबिक, बिट्टू ने 26 जनवरी 2026 को अजनार नदी की सफाई का अभियान शुरू किया। नदी की हालत देखकर उन्होंने इंतजार करने के बजाय खुद पहल करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने स्तर पर जरूरी सामान और उपकरण जुटाए और सफाई शुरू कर दी।

बताया गया है कि उन्होंने इस अभियान पर लगभग ₹30,000 अपनी ओर से खर्च किए। शुरुआती दौर में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने नदी से लगातार कचरा निकालने का काम जारी रखा।

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नदी में जमा था प्लास्टिक और कचरा
अजनार नदी के कई हिस्सों में प्लास्टिक, बोतलें, कचरा, शैवाल और अन्य अपशिष्ट जमा होने की तस्वीरें सामने आईं। बिट्टू ने इन चीजों को धीरे-धीरे हटाने का काम किया।

उनके सोशल मीडिया वीडियो और Before-After तस्वीरों में नदी के कुछ हिस्सों में दिखाई देने वाला बदलाव लोगों के लिए सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बना। इसी वजह से उनकी कहानी तेजी से सोशल मीडिया पर फैलने लगी।

सोशल मीडिया ने पहुंचाई कहानी दुनिया तक
बिट्टू ने अपने सफाई अभियान को सोशल मीडिया पर रिकॉर्ड करके लोगों के साथ साझा किया। वीडियो और तस्वीरों में उन्हें नदी से कचरा निकालते हुए देखा गया।

धीरे-धीरे उनके पोस्ट वायरल होने लगे और उनकी मेहनत की चर्चा मध्य प्रदेश से बाहर भी होने लगी। रिपोर्टों के अनुसार, उनके काम को उद्योगपति आनंद महिंद्रा और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत कई लोगों से प्रशंसा मिली।

यही सोशल मीडिया की ताकत उनकी कहानी में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। स्थानीय स्तर पर किया गया एक छोटा-सा प्रयास इंटरनेट के माध्यम से लाखों लोगों तक पहुंच गया।

डच CEO बोयन स्लैट ने दिया ‘Come work for us’ का ऑफर
बिट्टू की कहानी तब अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गई, जब The Ocean Cleanup के संस्थापक और CEO Boyan Slat की नजर उनके काम पर पड़ी।

सोशल मीडिया पर बिट्टू के नदी सफाई अभियान से जुड़ी पोस्ट सामने आने के बाद स्लैट ने उन्हें सार्वजनिक रूप से अपनी संस्था के साथ काम करने का न्योता दिया। उनका संदेश था:

Come work for us.
यह प्रस्ताव बिट्टू के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि The Ocean Cleanup दुनिया भर में समुद्र और नदियों में प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के लिए तकनीकी और पर्यावरणीय समाधान विकसित करने वाली संस्था है।

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क्या बिट्टू को नौकरी मिल चुकी है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। नौकरी का ऑफर/न्योता मिलने की खबर सामने आई है, लेकिन शुरुआत में पद, वेतन और अन्य नियुक्ति शर्तें सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं थीं।

7 सितंबर की Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, बिट्टू ने बताया कि उन्हें बोयन स्लैट का फोन आया था और उनकी credentials ली गईं। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय यह तय नहीं हुआ था कि उन्हें कौन-सा पद दिया जाएगा और संस्था बाद में उनसे संपर्क करेगी।

इसलिए इसे फिलहाल अंतरराष्ट्रीय नौकरी का निमंत्रण/ऑफर कहना अधिक सटीक है, न कि यह दावा करना कि उनकी नियुक्ति पूरी हो चुकी है।

इस कहानी का सबसे बड़ा संदेश क्या है?
बिट्टू तबाही की कहानी सिर्फ नदी की सफाई की कहानी नहीं है। यह इस बात का उदाहरण भी है कि एक व्यक्ति की पहल लोगों का ध्यान किसी बड़ी पर्यावरणीय समस्या की ओर आकर्षित कर सकती है।

अक्सर लोग सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी देखकर प्रशासन या दूसरे लोगों के कार्रवाई करने का इंतजार करते हैं। बिट्टू ने इसके बजाय खुद शुरुआत की। उनके प्रयास ने यह सवाल भी उठाया कि नदियों और जलस्रोतों की नियमित सफाई तथा कचरा प्रबंधन को लेकर स्थानीय स्तर पर और बेहतर व्यवस्था क्यों नहीं होनी चाहिए।

युवाओं के लिए बड़ी सीख
बिट्टू की कहानी से युवाओं को कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं—

समस्या देखकर केवल शिकायत करने के बजाय समाधान की शुरुआत की जा सकती है।

छोटे स्तर का काम भी लगातार किया जाए तो उसका प्रभाव बड़ा हो सकता है।

सोशल मीडिया का इस्तेमाल सकारात्मक सामाजिक और पर्यावरणीय काम को सामने लाने के लिए किया जा सकता है।

पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।

मेहनत और निरंतरता से स्थानीय स्तर का काम भी अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर सकता है।

लेकिन नदी की सफाई केवल एक व्यक्ति से संभव नहीं

बिट्टू का प्रयास निश्चित रूप से प्रेरणादायक है, लेकिन किसी नदी को लंबे समय तक साफ रखना केवल एक व्यक्ति के प्रयास से संभव नहीं होता।

इसके लिए स्थानीय प्रशासन, नगर निकाय, नागरिकों, दुकानदारों और आसपास रहने वाले लोगों को मिलकर काम करना होगा। अगर नदी में लगातार प्लास्टिक और कचरा डाला जाता रहेगा, तो सफाई के बाद कुछ समय में समस्या फिर पैदा हो सकती है।

इसलिए नदी की सफाई के साथ-साथ कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक का उचित निपटान, सीवेज नियंत्रण और लोगों में जागरूकता भी जरूरी है।

मध्य प्रदेश के युवा सुरेंद्र सिंह चौधरी यानी ‘बिट्टू तबाही’ ने अजनार नदी की सफाई के लिए जिस तरह व्यक्तिगत स्तर पर पहल की, उसने हजारों लोगों का ध्यान पर्यावरण संरक्षण की ओर खींचा है। उनके काम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं और आखिरकार यह प्रयास अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संगठन The Ocean Cleanup के संस्थापक और CEO बोयन स्लैट तक पहुंचा। इसके बाद उन्हें संस्था के साथ काम करने का न्योता मिला।

यह कहानी बताती है कि बदलाव के लिए हमेशा बड़े संसाधनों का इंतजार जरूरी नहीं होता—कभी-कभी बदलाव की शुरुआत एक व्यक्ति के छोटे लेकिन लगातार किए गए प्रयास से होती है।

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नोट: इस लेख में नौकरी के ऑफर से संबंधित जानकारी को उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। नियुक्ति का अंतिम पद, वेतन और शर्तें सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होने पर ही उनकी पुष्टि की जा सकती है।

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