Friday, 11 September 202618:19 IST

शेयर बाजार में आखिरी 10 मिनट का बड़ा उलटफेर: Sensex 138 अंक चढ़ा, Nifty 23,477 पर बंद

Updated: 10 Sep 2026, 14:34 IST · By Yk Pasha · 1 min read
शेयर बाजार में आखिरी 10 मिनट का बड़ा उलटफेर: Sensex 138 अंक चढ़ा, Nifty 23,477 पर बंद
Advertisement
Img 20260910 195554128639474497305163 1024x576

10 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार का आखिरी हिस्सा बेहद उतार-चढ़ाव वाला रहा। दिन के सामान्य कारोबार में कमजोरी दिखाने के बाद Closing Auction Session (CAS) के दौरान खरीदारी लौटने से बाजार ने अचानक दिशा बदल दी। इसके परिणामस्वरूप BSE Sensex 138.36 अंक यानी 0.19% की बढ़त के साथ 74,902.59 पर और Nifty 50 46.30 अंक यानी 0.20% की तेजी के साथ 23,477.80 पर बंद हुआ।

दिन के कारोबार में पहले दबाव में था बाजार
10 सितंबर की शुरुआत भारतीय बाजार ने मामूली बढ़त के साथ की थी। Sensex करीब 61.86 अंक ऊपर 74,826.09 और Nifty 50 करीब 14.80 अंक ऊपर 23,446.30 पर खुला था। हालांकि, दिन बढ़ने के साथ कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों की चिंता बनी रही।

सामान्य कारोबार के समाप्त होने के समय यानी लगभग 3:15 बजे, तस्वीर बिल्कुल अलग थी। उस समय Sensex करीब 134.73 अंक गिरकर 74,629.50 और Nifty करीब 42.25 अंक गिरकर 23,389.25 पर था। इसके बाद Closing Auction Session में खरीदारी बढ़ी और दोनों प्रमुख सूचकांक हरे निशान में पहुंच गए।

आखिरी मिनटों में कैसे बदला बाजार?
इस दिन की सबसे महत्वपूर्ण बात Closing Auction Session (CAS) रही। यह वह प्रक्रिया है जिसके जरिए बाजार के अंतिम बंद भाव को निर्धारित किया जाता है। हाल के दिनों में CAS के दौरान Sensex और Nifty में असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, खासकर डेरिवेटिव एक्सपायरी के दिनों में।

10 सितंबर को भी Sensex ने CAS के दौरान बहुत तेज उतार-चढ़ाव दिखाया। Reuters के अनुसार, अंतिम चरण में Sensex और Nifty के संकेतात्मक स्तर सामान्य कारोबार के मुकाबले अचानक ऊपर चले गए और अंततः मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। Sensex में साप्ताहिक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी ने भी उतार-चढ़ाव को बढ़ाने में भूमिका निभाई।

Power Grid बना प्रमुख गेनर
गुरुवार के कारोबार में Power Grid Corporation of India प्रमुख तेजी वाले शेयरों में रहा। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार Power Grid करीब 2.27% बढ़कर ₹272 के आसपास बंद हुआ।

Financial Express के बाजार आंकड़ों में भी Power Grid को प्रमुख गेनर बताया गया है। उसके बाद Tech Mahindra और Bharti Airtel जैसे शेयरों में भी मजबूती देखी गई।

हालांकि, सभी शेयरों में तेजी नहीं रही। Tata Steel, IndiGo और ICICI Bank जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। Tata Steel लगभग 1.4% से अधिक नीचे रहा, जबकि ICICI Bank और IndiGo भी दबाव में रहे।

कच्चे तेल की कीमत बनी बड़ी चिंता
भारतीय बाजार के लिए इस समय सबसे महत्वपूर्ण बाहरी जोखिमों में से एक कच्चे तेल की कीमत है। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Brent crude की कीमत 10 सितंबर को 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई और दिन के दौरान लगभग 101–102 डॉलर के आसपास रही।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर देश के आयात बिल, रुपये की विनिमय दर, महंगाई और कुछ उद्योगों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।

यही वजह है कि महंगे crude के दौर में निवेशक बाजार में अधिक सतर्क दिखाई दे रहे हैं। 9 सितंबर को भी Sensex में 813 अंक से ज्यादा की गिरावट हुई थी और वह लगभग तीन महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया था।

17890508534683522009632084197119 1024x577

विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी जारी
बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधि भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। 10 सितंबर से संबंधित बाजार आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में लगभग ₹583 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने करीब ₹1,509 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की।

इससे यह संकेत मिलता है कि घरेलू संस्थागत निवेशक बाजार को कुछ सहारा दे रहे हैं, जबकि विदेशी निवेशकों की ओर से दबाव बना हुआ है।

CAS को लेकर क्यों हो रही है चर्चा?
भारतीय शेयर बाजार में Closing Auction Session 3 अगस्त 2026 से लागू नए क्लोजिंग-प्राइस मैकेनिज्म का हिस्सा है। इसके लागू होने के बाद खासकर एक्सपायरी वाले दिनों में Sensex में अंतिम मिनटों के दौरान बहुत तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

3 सितंबर को भी Sensex में CAS के दौरान लगभग 4,000 अंकों का दोतरफा उतार-चढ़ाव देखा गया था। इस तरह की घटनाओं के बाद SEBI ने डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की settlement price निर्धारित करने की पद्धति की समीक्षा करने की बात कही है।

SEBI के सामने मुख्य मुद्दा यह है कि कैश मार्केट के अंतिम मूल्य में अचानक होने वाले बड़े बदलाव का असर expiry वाले derivatives पर पड़ सकता है। इसलिए नियामक settlement methodology में संभावित बदलावों पर विचार कर रहा है।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?
10 सितंबर की तेजी को देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि बाजार में पूरी तरह तेजी लौट आई है। दिन के सामान्य कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांक दबाव में थे और केवल अंतिम auction session में मजबूत खरीदारी के कारण बंद भाव सकारात्मक हुआ।

इस समय बाजार पर कई बाहरी और घरेलू कारकों का प्रभाव है—कच्चे तेल की कीमत, मध्य-पूर्व का तनाव, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक बाजारों का रुख। Reuters ने भी महंगे crude और भू-राजनीतिक तनाव को भारतीय बाजार के लिए प्रमुख चिंता बताया है।

इसलिए केवल एक दिन की 138 अंकों की Sensex बढ़त को बाजार में स्थायी बदलाव का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। निवेशकों के लिए कंपनियों के fundamentals, valuation और व्यापक आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना अधिक महत्वपूर्ण है।

10 सितंबर 2026 का भारतीय शेयर बाजार एक महत्वपूर्ण उदाहरण रहा कि अंतिम कुछ मिनटों में बाजार की तस्वीर कितनी तेजी से बदल सकती है। Sensex दिन के सामान्य कारोबार में लाल निशान में था, लेकिन Closing Auction Session में खरीदारी के बाद 74,902.59 पर 138.36 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ। Nifty 50 भी 23,477.80 पर 46.30 अंक ऊपर बंद हुआ।

17890508470058879859408202282786 1024x577

हालांकि, महंगा कच्चा तेल, मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति और CAS से जुड़ी असामान्य volatility के कारण बाजार में जोखिम अभी भी बना हुआ है। इसलिए इस तेजी को राहत की वापसी के रूप में देखना उचित है, लेकिन इसे अभी स्थायी तेजी की पुष्टि नहीं माना जा सकता।

नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। यह लेख समाचार एवं बाजार की उपलब्ध जानकारी पर आधारित है, निवेश सलाह नहीं है।

About The Author

Contact Us

कोई सुझाव, खबर या correction भेजना चाहते हैं? हमें संदेश भेजें।