
चाँद, जो हमारी पृथ्वी का सबसे करीबी पड़ोसी है, सदियों से हमारी कल्पनाओं को उड़ान देता आया है। हमने चाँद की जिस सतह को देखा है, वह केवल एक हिस्सा है – लगभग 59%। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चाँद का एक ऐसा भाग भी है जो कभी पृथ्वी से दिखाई नहीं देता? इसे ‘चाँद का अंधेरा पक्ष’ (Dark Side of the Moon) या ‘दूरस्थ भाग’ (Far Side) कहा जाता है। और अब, आर्टेमिस-2 (Artemis II) मिशन के जरिए, चार बहादुर अंतरिक्ष यात्री इस अनदेखे हिस्से को पहली बार अपनी आँखों से देखेंगे।
आइए, इस ऐतिहासिक मिशन की पूरी डिटेल समझते हैं।
1. आर्टेमिस-2 क्या है? (Artemis II Mission Overview)
आर्टेमिस-2, नासा (NASA) का एक महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन है। यह आर्टेमिस कार्यक्रम का दूसरा चरण है। आपको बता दें कि:
· आर्टेमिस-1 (2022) एक बिना चालक दल का (uncrewed) मिशन था, जिसने चाँद की परिक्रमा की और सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आया।
· आर्टेमिस-2 (प्रस्तावित: सितंबर 2025) में पहली बार मनुष्य चाँद के करीब जाएंगे, लेकिन वे चाँद पर उतरेंगे नहीं। यह एक चंद्र फ्लाईबाई (lunar flyby) मिशन होगा।
2. वे चार अंतरिक्ष यात्री कौन हैं? (The Crew of Artemis II)
नासा ने इस ऐतिहासिक मिशन के लिए तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री को चुना है। यह टीम इस मिशन को बेहद खास बनाती है:
1. रीड वाइसमैन (Reid Wiseman – कमांडर): अमेरिकी नौसेना के कप्तान और अनुभवी अंतरिक्ष यात्री। वह पहले भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर जा चुके हैं।
2. विक्टर ग्लोवर (Victor Glover – पायलट): वह इस मिशन के पायलट होंगे। वह पहले अफ्रीकी-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं जिन्होंने ISS पर लंबा समय बिताया।
3. क्रिस्टीना हॉक (Christina Koch – मिशन स्पेशलिस्ट): वह एक अनुभवी महिला अंतरिक्ष यात्री हैं। उनके नाम सबसे लंबे समय तक (328 दिन) अंतरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड है।
4. जेरेमी हैनसन (Jeremy Hansen – मिशन स्पेशलिस्ट): वह पहले कनाडाई हैं जो चाँद के इतने करीब जाएंगे। वह रॉयल कैनेडियन एयर फोर्स के पायलट हैं।
🔥 खास बात: यह पहली बार होगा जब एक महिला और एक गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री चाँद के दूरस्थ हिस्से के करीब जाएंगे।

3. क्या है ‘चाँद का अनदेखा हिस्सा’? (The Far Side of the Moon)
अक्सर लोग इसे ‘डार्क साइड’ कहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि यह हिस्सा अंधेरा नहीं है। इसे सूर्य की रोशनी उतनी ही मिलती है जितनी दिखने वाले हिस्से को। इसे ‘दूरस्थ भाग’ (Far Side) कहना ज्यादा सही है क्योंकि:
· टाइडल लॉकिंग (Tidal Locking): चाँद पृथ्वी के चक्कर लगाने में उतना ही समय लेता है जितना अपनी धुरी पर घूमने में। इसलिए चाँद का एक ही हिस्सा हमेशा पृथ्वी की तरफ रहता है।
· यह दूरस्थ भाग बेहद खुरदरा है, जिसमें हजारों की संख्या में क्रेटर (गड्ढे) हैं, जबकि दिखने वाला हिस्सा चिकना है।
· इस हिस्से को पहली बार 1959 में सोवियत अंतरिक्ष यान लूना-3 ने देखा था, लेकिन इतने करीब से किसी इंसान ने नहीं देखा है।
आर्टेमिस-2 के यात्री इसी दूरस्थ भाग के ठीक ऊपर से उड़ान भरेंगे – जहाँ से पृथ्वी बिल्कुल दिखाई नहीं देगी!
4. आर्टेमिस-2 मिशन की पूरी प्रक्रिया (Full Timeline)
यह मिशन लगभग 10 दिनों का होगा। आइए, इसे स्टेप बाई स्टेप समझें:
· दिन 1-2 (लॉन्च और स्थापना): फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से SLS (स्पेस लॉन्च सिस्टम) रॉकेट – जो अब तक का सबसे ताकतवर रॉकेट है – द्वारा ओरियन (Orion) अंतरिक्ष यान को लॉन्च किया जाएगा। यह पृथ्वी की कक्षा में स्थापित होगा।
· दिन 3 (चाँद की ओर प्रस्थान): यान अपने इंजनों को फायर करेगा और पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण सीमा से बाहर निकलकर चाँद की तरफ बढ़ेगा।
· दिन 4-5 (चाँद के दूरस्थ भाग के ऊपर से उड़ान): यह सबसे रोमांचक क्षण होगा। ओरियन यान चाँद की सतह से मात्र 100 किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। यात्री उस अनदेखे हिस्से को अपनी खिड़कियों से देखेंगे। इस दौरान पृथ्वी से कोई संपर्क नहीं होगा क्योंकि चाँद का शरीर रेडियो सिग्नलों को रोक लेता है।
· दिन 6-8 (वापसी यात्रा): यान चाँद के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करते हुए (slingshot effect) वापस पृथ्वी की ओर उड़ान भरेगा।
· दिन 10 (स्प्लैशडाउन): यान प्रशांत महासागर में पैराशूट की मदद से उतरेगा, जहाँ नौसेना के जहाज उसे सुरक्षित बाहर निकालेंगे।
5. क्यों है यह मिशन इतना महत्वपूर्ण? (Why Artemis II Matters?)
आर्टेमिस-2 सिर्फ एक उड़ान नहीं है; यह भविष्य की नींव है:
1. आर्टेमिस-3 का मार्ग प्रशस्त करना: 2026 में होने वाला आर्टेमिस-3 मिशन पहली महिला और पहले अश्वेत व्यक्ति को चाँद की सतह पर उतारेगा। यह मिशन सभी प्रणालियों की परीक्षा है।
2. मंगल की तैयारी: इस मिशन से यह सीखा जाएगा कि इंसान लंबी अवधि तक पृथ्वी से दूर कैसे रह सकता है। भविष्य में मंगल ग्रह की यात्रा के लिए यह जरूरी है।
3. नई तकनीक का परीक्षण: ओरियन यान की लाइफ सपोर्ट सिस्टम, हीट शील्ड (जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय 2,800°C तापमान झेलती है) और नेविगेशन का परीक्षण इसी मिशन में होगा।
6. रोचक तथ्य (Interesting Facts)
· जब यात्री चाँद के दूसरी तरफ होंगे, तब पृथ्वी उनके आसमान में ‘ढलते चाँद’ की तरह दिखेगी – एक अद्भुत दृश्य!
· आर्टेमिस का नाम ग्रीक पौराणिक कथा की देवी, अपोलो की जुड़वाँ बहन, के नाम पर रखा गया है। अपोलो मिशन में हम चाँद पर गए थे; अब आर्टेमिस हमें वापस ले जा रही है।
· पूरा मिशन करीब 2.1 मिलियन किलोमीटर (1.3 मिलियन मील) की यात्रा करेगा।

निष्कर्ष (Conclusion)
आर्टेमिस-2 सिर्फ एक वैज्ञानिक प्रयोग नहीं है; यह मानवीय जिज्ञासा और साहस की जीत है। जब रीड, विक्टर, क्रिस्टीना और जेरेमी उस अनदेखे चाँद को देखने के लिए उड़ान भरेंगे, तो वे पूरी मानवता का प्रतिनिधित्व कर रहे होंगे। यह वह पल होगा जब हम एक बार फिर यह साबित करेंगे कि ‘हम वहाँ पहुँचेंगे जहाँ कोई नहीं पहुँचा’।
चाँद के इस अनदेखे हिस्से की तस्वीरें जल्द ही हमारे सामने होंगी – और यह इतिहास का एक सुनहरा पन्ना होगा। चांद की ओर बढ़ता यह सफर हर भारतीय के लिए भी प्रेरणा है, क्योंकि भविष्य के आर्टेमिस मिशनों में भारतीय अंतरिक्ष यात्री भी शामिल हो सकते हैं!
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