
भारतीय मूल के न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ज़ोहरान ममदानी से ब्रिटेन के किंग से मुलाकात से कुछ घंटे पहले पूछा गया कि वह किंग चार्ल्स III से क्या कहेंगे। इसपर ममदानी ने कहा कि वह किंग चार्ल्स को ऐतिहासिक कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने को कहेंगे। गौरतलब है, 100 से अधिक कैरेट का कोहिनूर 1849 से ब्रिटेन के पास है।
⚫ कोहिनूर वापसी का सवाल: न्यूयॉर्क के मेयर ने किंग चार्ल्स से क्या कहा?
न्यूयॉर्क। भारतीय मूल के न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III से मुलाकात से पहले एक बड़ा बयान देकर इतिहास के उस पन्ने को फिर से हिला दिया है, जो आजादी के दशकों बाद भी बंद नहीं हुआ है। ममदानी ने साफ कहा कि अगर वह किंग चार्ल्स से अलग से बात करेंगे, तो वह उनसे कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने का आग्रह करेंगे
⚫ क्या है पूरा मामला?
यह घटना तब सामने आई जब ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III और कैमिला 11 सितंबर के हमले की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर न्यूयॉर्क के दौरे पर थे । वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित इस स्मरण समारोह से पहले जब पत्रकारों ने मेयर ममदानी से पूछा कि वह ब्रिटेन के सम्राट से क्या कहेंगे, तो उनका जवाब औपचारिक राजनयिक जुमलों से हटकर था।
ममदानी ने कहा, “उस कार्यक्रम में ध्यान हमलों में मारे गए 3,000 से अधिक न्यूयॉर्कियों को सम्मान देने पर होना चाहिए। लेकिन अगर मैं राजा से अलग से बात करूं, तो शायद मैं उन्हें कोहिनूर हीरा वापस करने के लिए प्रोत्साहित करूंगा।”
हालांकि, एक राहत भरी खबर यह है कि समारोह के दौरान किंग चार्ल्स के साथ बातचीत में ममदानी इस मुद्दे को नहीं उठाया, क्योंकि उन्होंने इसे “सम्मान समारोह” बताते हुए इसे
राजनीति से दूर रखा
⚫ कोहिनूर वापसी बहस क्यों?
ममदानी के इस बयान ने सिर्फ इसलिए सुर्खियां बटोरीं क्योंकि कोहिनूर सिर्फ एक हीरा नहीं है। 105.6 कैरेट का यह विशाल हीरा औपनिवेशिक शोषण और लूट का प्रतीक माना जाता है
⚫ इतिहास संक्षेप में:
👉 उत्पत्तिः भारत की कोल्लूर खान (आंध्र प्रदेश) में मिला, मूल वजन 186 कैरेट था
👉 प्रारंभिक स्वामीः कहा जाता है कि यह काकतीय वंश के पास था और देवी भद्रकाली की मूर्ति में लगा था।
👉 बदलते हाथः यह खिलजी, मुगल बादशाह (बाबर से लेकर मुहम्मद शाह तक), फारस के नादिर शाह और फिर सिख साम्राज्य के महाराजा रणजीत सिंह के पास रहा
👉 अंग्रेजों के पास: 1849 में द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध के
बाद, लाहौर की संधि के तहत महज 13 वर्षीय महाराजा दिलीप सिंह से ‘सौंपा’ गया। इसके बाद यह क्वीन विक्टोरिया के पास पहुंचा।
आज यह हीरा टॉवर ऑफ लंदन में शाही ताज का हिस्सा है। हालांकि, भारत सरकार ने अतीत में कहा था कि यह “न तो चुराया गया और न ही जबरन लिया गया” (2016 में सुप्रीम कोर्ट में दिए बयान के अनुसार) लेकिन जनता और कई नेताओं की भावना आज भी इसे वापस पाने की है।
⚫ सिर्फ कोहिनूर ही नहीं…
ममदानी के बयान ने एक और बहस छेड़ दी है। भारत से ऐसे कई कीमती हीरे और कलाकृतियां गईं जो कभी वापस नहीं लौटीं। दरिया-ए-नूर (जो अब ईरान में है) और नादिर शाह जैसे रत्न भी इस सूची में शामिल हैं। अगर कोहिनूर लौटता है, तो शायद यह दूसरे देशों (जैसे ग्रीस के एल्गिन मार्बल्स) के लिए भी दावा पेश करने का रास्ता खोलेगा।
⚫ क्या होगा आगे?
ममदानी का यह बयान औपचारिक राजनयिक मांग से कहीं ज्यादा एक मजबूत प्रतीकात्मक इशारा था। उन्होंने एक ऐसे युवा राजनेता के तौर पर जहां भारतीय मूल पर गर्व है, वहीं उपनिवेशवाद के अंधेरे इतिहास को स्मरण समारोह के मंच पर याद दिला दिया। हालांकि शाही परिवार ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस विवाद को एक बार फिर से जिंदा कर दिया है।
क्या एक दिन कोहिनूर भारत वापस आएगा? यह तो भविष्य बताएगा, लेकिन न्यूयॉर्क के मेयर ने यह जरूर साबित कर दिया कि “माउंटेन ऑफ लाइट” (कोहिनूर का अर्थ) की चमक की गूंज आज भी इतिहास के पन्नों से बाहर निकलकर दुनिया के सबसे बड़े शहर के मेयर की जुबान पर सुनाई देती है।
